बिहार के लाल हैमर हेडमैन धर्मेंद्र ने बनाया विश्व रिकॉर्ड, सिर से 1 मिनट में 24 सरिया मोड़ कर अर्मेनिया के एडांट्स का तोड़ा रिकॉर्ड

  • गिनिज बुक में एक बार दर्ज कराया अपना नाम, दुनिया में बजाया बिहार के कैमूर जिले का डंका
  • अर्मेनिया के एडांट्स के 1 मिनट 18 सरिया मोड़ने के रिकॉर्ड को कैमूर के लाल हैमर हेडमैन धर्मेन्द्र ने तोड़ा
भभुआ/कैमूर(बंटी जायसवाल)। लोग कहते है कि जो दृढ़इच्छा शक्ति के साथ परिश्रम कर कुछ अलग करने की ठान लें तो वह कर दिखाता है। उसी परिश्रम की बदौलत उसे नया मुकाम भी हासिल होता है। सफलता उसके चरणों को चूमती है। वह अपनी सफलता से देश दुनिया में नाम रौशन कर देता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है बिहार के कैमूर जिले के लाल धर्मेंद्र सिंह। जिसने अपने हैरतअंगेज कारनामें से अपना नाम गिनीज बुक में दर्ज करा कर विश्व रिकॉर्ड बनाया है। 
जिन्हें इंडिया के हैमर हेडमैन के उपाधि से सम्मानित किया गया है। हैमर हेडमैन धर्मेंद्र सिंह ने 1 मिनट में 12 एमएम का 24 लोहे का सरिया(छड़) को सिर पर रख कर हाथ से मोड़ कर विश्व रिकार्ड बनाया है। इसके पहले अर्मेनिया के एडांट्स का रिकॉर्ड बनाया था। जिसके रिकॉर्ड को हैमर हेडमैन धर्मेंद्र ने तोड़ डाला और अपना नाम दर्ज कर दिया। एडांट्स ने एक मिनट में 18 सरिया मोड़ने का रिकॉर्ड 2015 में बनाया था।  
दरअसल, सोमवार को गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम  धर्मेंद्र का दर्ज हो गया है। इनका त्रिपुरा के अगरतल्ला में गिनिज बुक ने इस हैरतअंगेज कारनामे के फाइनल टच का वीडियो रिकॉर्ड किया। गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में धर्मेंद्र का नाम दर्ज होते ही त्रिपुरा स्टेट राइफल्स के अधिकारियों ने हैमर हेडमैन को बधाई देते गर्व जताया। वहीं धर्मेंद्र ने पूरे देश दुनिया में भारत का नाम रौशन करते हुए डंका बजा दिया। 
जो कैमूर जिले के रामगढ़ गांव के निवासी है। वह वर्तमान में त्रिपुरा स्टेट राइफल्स में सब इंसपेक्टर के पद पर तैनात है। इनके पिता अपलेश्वर सिंह किसान है तो इनकी माता कुंती देवी सरपंच है। जब सोमवार को धर्मेंद्र का नाम विश्व रिकॉर्ड में शामिल हुआ तो उनके गांव रामगढ़ में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। सभी धर्मेंद्र की इस उपलब्धि से गौरवान्वित महसूस कर रहे है। हैमर हेडमैन धर्मेंद्र सिंह ने अपने गांव सहित कैमूर, बिहार और भारत का नाम पूरे दुनिया में परचम लहराया है।


कैमूर लाइव न्यूज़ से दूरभाष से बातचीत में हैमर हेडमैन धर्मेंद्र सिंह की उपलब्धि पर बधाई दिया गया। उन्होंने जय हिंद कहते हुए आभार व्यक्त है। कहा भारत माता की कृपा है मैं देश की सेवा करते हुए इस मुकाम पर पहुँचा। यह भी बताया कि वह लोहे का सरिया सिर पर रखकर हाथ से मोड़ने का अभ्यास 6 माह से कर रहे थे। इसके साथ वह प्रतिदिन सिर पर डंबर से वार करके भी अभ्यास करते है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में इंटरनेशनल स्टंट में विश्व रिकॉर्ड बनाकर देश का परचम दुनिया में लहराया था।
त्रिपुरा के अगरतल्ला में इंडियन वर्ल्ड रिकॉर्ड फाउंडेशन की ओर से आयोजित स्टंट में तीन मिनट में 51 कच्चे बेल (वुड्स एपल) सिर से तोड़ने का विश्व रिकॉर्ड बनाया है। इसके अलावे एक मिनट में 57 नारियल सिर से तोड़कर स्टंट गेम में दुनिया के 21 देशों के प्रतिभागियों को पछाड़ा था। इसके बाद से ही मुझे त्रिपुरा स्टेट राइफल्स द्वारा हैमर हेडमैन के उपाधि से सम्मानित किया गया था। साथ ही सिपाही से मुझे सब  इंस्पेक्टर के पद पर पदोन्नति किया गया। उन्होंने बताया कि अभी जो रिकॉर्ड बनाया है। आगे भी लक्ष्य जारी रखते हुए रिकॉर्ड बनाने का काम करूंगा।
12 साल की उम्र में सिर से नारियल तोड़ने का आया ख्याल, हुई शुरुआत
धर्मेंद्र ने बताया कि 12 साल की उम्र में सिर से नारियल तोड़ने का ख्याल आया था। एक बार जब मैं मां मुंडेश्वरी के धाम गया था तो देखा कि सभी लोग नारियल प्रसाद चढ़ाने के बाद नीचे जमीन पर नारियल तोड़ रहे है। मेरे दिल से ख्याल आया कि क्यू न इस नारियल को अपने सिर को तोड़ कर चढाऊँ। तो उस समय ही मैने नारियल को सिर पर मार कर तोड़ने की कोशिश की थी। लेकिन पहली बार नारियल नहीं टूटा सिर फट गया था। इसके दूसरी बार संकटमोचन बनारस में भी सिर फट गया था। लेकिन मैंने हार नहीं माना। अपना अभ्यास जारी रखा। 

विश्व रिकॉर्ड बना कर भारत का नाम रौशन करने पर गर्व : मां कुंती देवी
बेटे धर्मेंद्र के विश्व रिकॉर्ड बनाने की उपलब्धि से मां कुंती देवी काफी खुश है। परिवार के लोगों ने खुशी के साथ गर्व महसूस कर रहे है। उन्होंने बताया कि बेटे ने देश की सेवा करने के साथ विश्व रिकॉर्ड बनाकर विश्व में भारत का नाम रौशन किया है। जो उपलब्धि उसे मिली है। हमें उस पर नाज है। यह भी बताया कि जब बचपन सिर से बेल तोड़ने का काम करता तो उसे मना किया जाता था। लेकिन वह मानता नहीं था। वह खेत पर जाकर पेड़ के पीछे छुप कर अभ्यास करता था। 
वही किसान पिता अपलेश्वर सिंह ने बताया कि बेटे ने अपने नाम,गांव,जिला,राज्य और देश का मान सम्मान बढ़ाया है। जिससे हम गर्व महसूस कर उसके पिता होने पर। बचपन की हरकतों को हम समझ नहीं पाए लेकिन आज उसके कारनामें से सभी हैरान है। वही उसने विश्व रिकॉर्ड तक बना डाला है। 

बड़े भाई दीपू ने बताया कि कहा कि भाई के इस उपलब्धि से बहुत खुश है। उन्होंने पूरे देश दुनिया में अपने नाम गिनिक बुक में रिकॉर्ड दर्ज कराया और बिहार और भारत का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया है। वह एक बार जो ठान लेता था वह एक दम करके ही दम लेता था। आज उसकी नतीजा है कि वह नारियल, बेल तोड़ विश्व रिकॉर्ड बनाने के अलावा अब सिर से 24 लोहे का सरिया मोड़ कर एक बार फिर विश्व रिकॉर्ड बना दिया है। 
रामगढ़ के समाजसेवी अखिलेश श्रीवास्तव ने बताया कि धर्मेंद्र अपने कारनामें, स्टंट से सबको हैरान कर देता था। उसने जो कारनामें से विश्व रिकॉर्ड बनाया है। जिससे कैमूर का डंका पूरी दुनिया मे बजा दिया। इस उपलब्धि से रामगढ़ के लोग काफी गौरवान्वित हो रहे है। इसी तरह आगे बढ़ने के लिए बधाई भी दिया। कहा देश दुनिया में नाम रौशन करें।

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