- जिला प्रशासन द्वारा से तीन बार कार्यक्रम में हो चुका है सम्मानित, मिला है ट्रॉफी,मेडल और प्रशस्ति पत्र
- गरीबी में मजदूरी कर परिवार के 5 सदस्यों का कर रहा है भरण पोषण
- कोरोना को लेकर हुए लॉक डाउन ने कैमूर के उभरते गायक कलाकार को ला दिया बैकफुट पर
भभुआ/कैमूर(बंटी जायसवाल)। कोरोना ने भारत सहित पूरे देश विदेश की अर्थव्यवस्था को बेपटरी पर कर दिया। लेकिन अब देश अनलॉक होने के बाद कुछ हालात सुधर सकते है। कोरोना को लेकर भारत में 4 चौथे चरण तक लोगों के हालात खराब रहे। लोग बेरोजगार हो गए। लॉक डाउन से सबसे ज्यादा परेशानी गरीब मज़दूर वर्ग के लोगों को उठानी पड़ी। वही बिहार से बाहर दूसरे राज्यों में गए प्रवासियों ने तो पलायन कर घर आने लगे। लॉक डाउन के दौरान उन छोटे गायक, कलाकार,डांसर आदि को काफी मुसीबतें उठानी पड़ी।जिन्होंने कभी सोचा नहीं था।वे बेरोजगारी होकर पेट चलाने के मजदूरी सहित दूसरे काम करने लगे है।
कैमूर में ऐसा ही एक मामला गायक कलाकार का सामने आया है। जो दिल को झकझोर कर रख देगा। एक ऐसा गायक कलाकार जो जिला प्रशासन से कई कार्यक्रम में तीन बार सम्मानित हो चुका है। लेकिन आज वह लॉक डाउन में बेरोजगार होने के बाद घर परिवार के चलाने के लिए मजदूरी कर रहा है। वह भी राजमिस्त्री के साथ। उस गायक कलाकार का नाम है ढुनमुन राजा रसिया।जो जिले के भगवानपुर प्रखंड के उमापुर गांव का निवासी है।
ऐसी विकट परिस्थितियों में भी जिला प्रशासन को इस गायक कलाकार के बारे में याद नहीं आयी। जो जिला प्रशासन के हर जागरूकता कार्यक्रम में अपने गीत संगीत से लोगों को जागरूक करने का काम किया। चाहे वह मतदाता जागरूकता हो,जल जीवन हरियाली के लिए मानव श्रृंखला आदि कार्यक्रम में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हुए अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाया।
250 रुपये पर राजमिस्त्री के साथ लेबर का काम
कोरोना को लेकर हुए लॉक डाउन में बेरोजगार होने व आमदनी खत्म होने व घर का खर्चा चलाने के लिए कैमूर के उभरते गायक कलाकार मजदूरी करना पड़ रहा है। वह भी राजमिस्त्री के साथ ईंट और सीमेंट का काम कर रहा है। गायक धुनने बताया कि लॉक डाउन में एक महीने के बाद कुछ दिनों तक गुजर बसर काम नहीं होने कारण तो जैसे तैसे हो गया।
किसी के आगे नहीं फैलाया हाथ
लेकिन परिवार का खर्चा चलाने के लिए कुछ नहीं रहा तो क्या करते।इसलिए मजदूरी करने का फैसला किया। गरीब है लेकिन किसी के आगे हाथ नही फैलाने गया। लगभग एक माह से परिवार को पेट पालने के लिए राजमिस्त्री के साथ भगवानपुर के मातर गांव में जा कर मजदूर के रूप में काम करता हूँ। जिससे 250 से 300 रुपये तक मिल जाते है। उसी रुपये से दो जून की रोटी का इंतजाम करता हूँ। कोई रोजगार का साधन भी नहीं है।
गरीबी के बीच गुजर रहा है परिवार
कैमूर लाइव न्यूज़ से एक्सक्लूसिव बातचीत में लॉक डाउन व गरीबी की मार झेल रहे जिला प्रशासन से सम्मानित 26 वर्षीय गायक कलाकार ढुनमुन राजा रसिया ने बताया कि वह एक गरीब परिवार से संबंध रखता है। वह कैमूर जिले के भगवानपुर प्रखंड के उमापुर गांव के निवासी है। उसने स्नातक तक की पढ़ाई कला संकाय से भगवानपुर के राजर्षी शारिवाहन कॉलेज से की है। बचपन से गाना गाने का शौक रहा है।
पिता भभुआ में चलाते थे रिक्शा
गायक ने बताया कि उसके पिता शंकर राम 50 वर्षीय लॉक डाउन के पहले भभुआ शहर में खींचने वाला रिक्शा चलाते थे। रिक्शा चलाकर ही दो भाई व एक बहन को बड़ा किया। मां मुआ देवी की निधन के बाद से ही पिता ने पालन पोषण किया। वह दो भाई व एक बहन में बड़ा है। जिसमें छोटा भाई अमर कुमार है। जिसने मैट्रिक तक भी गरीबी के कारण पढ़ाई नहीं कर पाया। वही बहन धर्मशीला की शादी होने के बाद ससुराल चली गयी है। मैंने परिवार को देखते हुए अभी तक शादी नहीं की है।
50 हजार रुपये का है कर्ज
गायक ने बताया कि घर में मां नहीं रही तब कोई खाना बनाने वाला नहीं है। इस कारण काफी परेशानी होती रही है। अपने से ही खाना बनाना पड़ता है। बूढ़ी दादी भी है। परेशानी को देखते हुए एक साल पहले ही छोटे भाई की 50 हजार दूसरे लोगों से कर्ज लेकर शादी किया था। जिसका अभी भरपाई करना बाकी है। सोचा था कि इस सीजन में गाना गाकर जो भी रूपये मिलेंगे।उससे सबका कर्ज दें दूंगा। लेकिन यह उल्टा हो गया। आज रूपये के लिए दूसरे के सामने हाथ नहीं फैलाने के बजाय मजदूरी कर रहा हूं।
सरकारी योजनाओं का नहीं मिल पाता है लाभ
गायक ने यह भी सरकार द्वारा गरीबों के योजनाओं तो चला रही है। लेकिन हर गरीबों के पास नहीं पहुँच पा रहा है।मेरे आज भी मिट्टी का मकान है। राशन तो मिल जाता है। उज्ज्वला योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। घर में मां नहीं होने के कारण कोई और महिला नहीं होने के कारण उसका लाभ नहीं मिल पाया। हर योजनाएं महिला के नाम से हो रही है। ऐसे में हम गरीब परिवार को इसका लाभ नहीं मिल पाया है।उसने यह भी बताया कि जंगल से लकड़ियों को लाकर आज भी भोजन बनाने के लिए चूल्हा जलता है। क्या करें उतना रुपये नहीं है गैस सिलेंडर ले सकें। फ्री वाला उज्ज्वला योजना का लाभ नहीं मिल पाया तो ऐसे ही चलता है।
जिला प्रशासन से तीन बार सम्मानित
कैमूर लाइव न्यूज से एक्सक्लूसिव बातचीत में गायक कलाकार ढुनमुन राजा रसिया ने बताया कि गाने का शौक बचपन रहा। 2014-2015 गायिकी के क्षेत्र में अपना कैरियर बनाने का सोच लिया। इसके बाद ही गाना गाते आ रहा है। जिला प्रशासन के द्वारा हर कार्यक्रम में अपने गीत संगीत के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का काम किया। जिसमें तीन बार जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित किया गया।
वॉयस ऑफ कैमूर विनर बना
जल जीवन हरियाली कार्यक्रम,बाल विवाह,शराबबंदी, दहेज मुक्ति उन्मूलन के दौरान मानव श्रृंखला के लिए जागरूकता में जिला प्रशासन के साथ अपने टीम के साथ जागरूकता गीत गाया। वही मुंडेश्वरी धाम में जल जीवन मुख्यमंत्री के अगमन के दौरान भी स्टेज परफॉर्मेंस दिया था। पिछले साल भगवान भास्कर महोत्सव भभुआ में प्रथम पुरस्कार से जिला प्रशासन डीएम साहब द्वारा सम्मानित किया गया था। वही मतदाता जागरूकता के लिए voice of kaimur के लिए प्रथम पुरस्कार मिला। स्वतंत्रता दिवस में कार्यक्रम के दौरान जिला प्रशासन द्वारा ट्रॉफी व मेडल, प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कोरोना का भी गाया जागरूकता गीत
गायक कलाकार ने बताया कि कोरोना व लॉक डाउन पर भी जागरूकता गीत गाया।जिसमें आइल बाईल बा कोरोना महामारी..., मत घबराई, संगे बिताई, अपना घर परिवार में ... आदि कई गाना गाया। जिसे लोगों ने काफी पसंद भी किया। मेरे गीतकार लवकुश राज, गुरुजी कमलेश कुमार सिंह है। जिन्होंने गायकी के लिए काफी सपोर्ट किया। 

गायकी से चलाता था घर परिवार
गायक ने बताया कि 10 से ज्यादा एलबम में गाना गाया। लेकिन आर्थिक तंगी के कारण एलबम पर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद स्टेज शो, शादी विवाह,प्रोग्राम,सरकारी कार्यक्रम में गाना गाकर घर परिवार चलाने का काम करता था। लेकिन कोरोना ने सब बर्बाद कर दिया। यह भी बताया कि लगन के दिनों, त्योहार पर लोगों द्वारा स्टेज शो प्रोग्राम के लिए बुलाया जाता था।
फेसबुक पर शेयर किया दर्द, कहा कोरोना के कलाकारी खत्म,किस मोड़ पर आ गए साहब
गायक ढुनमुन राजा रसिया ने अपने फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लिखा कि एक कलाकार की क्या हालत है,इस करोना में... कलाकारी खत्म, हाय रे गरीबी...अबकी साल कोरोना महामारी के चलते हम इस मोड़ पर आ गए साहब।इसलिए फेसबुक हाल चाल करना छूट गया। आज सोचा हाल चाल कर लें। इस पोस्ट के साथ अपनी 5 तस्वीरें भी मजदूरी करते वक्त की शेयर की है।
जिससे तीन चार माह में 50-60 हजार रुपये की कमाई हो जाती थी।जिससे एक साल तक घर परिवार चलाने पड़ते। वही पिता रिक्शा चलाते थे भभुआ में। लेकिन इस बार लॉक डाउन में सब लगन सीजन खत्म हो गया। पिता जी भी घर बैठ गए। इसलिए परिवार को चलाने की जिम्मेदारी मेरे कंधे पर आ गयी तो मजबूरी में मजदूरी कर रहे है।
जिला प्रशासन से मदद की आस
गायक कलाकार ने बताया कि अपनी गरीबी,मजबूरी का दुखड़ा किसे सुनाए। जिला प्रशासन के डीएम साहब से लेकर अन्य पदाधिकारियों से जान पहचान है। लेकिन शर्म के मारे उनसे मदद नहीं मांगी। लॉक डाउन में बेरोजगारी व पेट के लिए मजदूरी करना शुरू कर दिया। जब पूछा गया क्या जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगायेंगे तो कहाँ कि अगर जिला प्रशासन द्वारा इस विकट परिस्थितियों में मदद किया जाता और उन्हें रोजगार मुहैया कराया जाता है। काफी राहत मिल जाती है। अब देखना यह होगा कि इस खबर के बाद जिला प्रशासन द्वारा उसके कला के लिए तीन बार सम्मानित किया है। उसकी मदद की जाती है या नहीं।
जिला आपूर्ति पदाधिकारी करेंगे 5 हजार रुपये की मदद
वही इस संबंध में जब जिला आपूर्ति पदाधिकारी प्रभात कुमार झा से पूछने बताया कि गायक कलाकार ढुनमुन राजा रसिया को मैं अच्छा से जानता हूं। लेकिन मुझे यह नहीं जानकारी है कि वह मजदूरी का काम कर रहे है। अगर ऐसा बात है तो आप उन्हें मेरे कार्यालय में भेजिए। मैं अपने तरफ से 5 हजार रूपये जीविकोपार्जन के लिए उस गायक कलाकार को मदद करूंगा।
कैमूर लाइव न्यूज़ की अपील, आप भी करें इस गायक कलाकार की मदद
कैमूर लाइव न्यूज की ओर अपील है कि गायक कलाकार पहले अपने गीतों से मनोरंजन किया,समाज में जागरूकता लाने का काम किया। उसका ऐसा समय आ गया है वह मजदूरी करने को विवश है। अपने परिवार व पेट को पालने के लिए। ऐसे में जिले के होनहार, प्रतिभावान गायक कलाकार की इस विकट परिस्थितियों में मदद करें। अगर जो भी संभव हो अपनी मदद पहुँचाये।









