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भभुआ/कैमूर. कैमूर से बड़ी खबर आ रही है. जहां जिले के कई प्रखंडों में फर्जी सर्टिफिकेट पर नौकरी करने वाले 6 शिक्षकों को विजिलेंस की जांच में पकड़ा गया है. जिनके विरुद्ध स्थानीय थाने में एफआईआर भी दर्ज कराया जा चुका है. जिसके बाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए सेवा से इन्हें बर्खास्त किया जायेगा. यह मामला जिले के अधौरा, चैनपुर, नुआंव सहित अन्य प्रखंडों के स्कूलों में फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे नौकरी करने वाले छह शिक्षको का है जो विजिलेंस की जांच में पकड़े जा चुके हैं. जानकारी के मुताबिक, इन शिक्षकों के वेतन पर रोक लगा दी गई है. डीपीओ ने संबंधित नियोजन इकाइयों को इस मामले में अग्रेतर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.
गौरतलब है कि हाई कोर्ट के निर्देश पर नियोजित शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया और प्रमाण पत्रों की जांच निगरानी अन्वेषण ब्यूरो कर रही है. कैमूर के 5250 शिक्षकों के विरुद्ध 4850 शिक्षकों के सर्टिफिकेट की जांच प्रक्रिया में है. अब तक 450 शिक्षकों के सर्टिफिकेट पंचायत सचिवों द्वारा निगरानी को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं. इस मामले में लापरवाही को लेकर पंचायत सचिवों पर केस दर्ज किया गया है।
विजिलेंस ने बोर्ड से करायी जांच
विजिलेंस ने 6 शिक्षकों का फ़र्जी सर्टिफिकेट की जांच बिहार बोर्ड से करायी है. जांच में यह भी पाया गया कि इनकी बहाली भी नियमानुसार नहीं की गई है. चैनपुर प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय पर्वतपुर की शिक्षिका पूजा कुमारी सिंह और उत्क्रमित मध्य विद्यालय गुलडीया में कार्यरत निर्मला देवी, अधौरा प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय पंचमाहुल में कार्यरत शिक्षक बद्री प्रसाद, पंचायत शिक्षक गोईयां सरोज कुमारी और प्राथमिक विद्यालय जोरदाग के दद्दन सिंह नुआव के अकोलही पंचायत में कार्यरत अरुण कुमार चौबे को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया गया है. इन शिक्षकों के वेतन पर रोक लगाई जा चुकी है. विजिलेंस की जांच में अभी कई फर्जी सर्टिफिकेट पर नौकरी कर रहे शिक्षकों पर तलवार लटकने की संभावना बनी हुई है.
वही इस मामले में डीईओ सूर्य नारायण ने बताया कि जिन शिक्षकों के विरुद्ध निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने केस दर्ज किया है, उन्हें नियमानुसार सेवा से बर्खास्त किया जायेगा. पंचायत सचिव सह सदस्य सचिव और शिक्षक नियोजन को आदेश दिया जा रहा है. इसके बाद कार्रवाई की जाएगी.

