![]() |
| भगवानपुर प्रखंड के निबियाँ प्राथमिक विद्यालय में फंसे औरंगाबाद के मजदूर व बच्चें |
#मजदूरों के साथ में है 9 मासूम बच्चें, भूख से बिलबिला रहे है दूध मुंहे शिशु व मासूम बच्चें
#मजदूरों को एक जून की रोटी खाने के पड़े है लाले,संवेदक ने नहीं की कोई मदद
#पुलिस प्रशासन से औरंगाबाद के मजदूरों को उम्मीद
#अभी तक पुलिस प्रशासन व जनप्रतिनिधियों में मदद के लिए कोई नहीं आया आगे
भभुआ(बंटी जायसवाल)/भगवानपुर। कोरोना वायरस कहर चीन के वुहान शहर से निकल कर पूरे विश्व में अपना कहर बरपा रहा है।इटली,स्पेन,अमेरिका,जर्मनी के अलावा कई देशों को चपेट में ले रखा है। भारत में भी कोरोना वायरस अपना पांव तेजी से पसार रहा है। भारत में अब तक रिपोर्ट के मुताबिक, 1 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके है।वही 26 लोगों की अब मौत हो चुकी है। कोरोना वायरस से बचाव व संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पीएम मोदी द्वारा 24 मार्च के रात 12 बजे से ही पूरे देश में लॉक डाउन कर दिया गया है। जिसके कारण जो जहां है वही फंस गया है। ऐसे में दूसरे जिले,राज्यों से आने वाले मजदूरों के सामने आफत आ खड़ी हुई है।
विद्यालय में लॉक डाउन में कैद है औरंगाबाद के मजदूर
ऐसा ही एक मामला कैमूर के भगवानपुर प्रखंड के निबियाँ गांव के विद्यालय में लॉक डाउन में कैद औरंगाबाद के मजदूरों के साथ हुआ है।ये मजदूर कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन में निबियां गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में फंसे हुए है। इन मजदूरों को खाने की आफत बनी हुई। एक जून की रोटी के मोहताज हो गए है। भुखमरी के कगार पर पहुँच गए है।पुलिस प्रशासन से मजदूरों ने घर वापसी के लिए मदद की गुहार लगाई है। इन मजदूरों में 6 महिलाओं सहित कुल 15 मजदूर और 9 मासूम बच्चें भी है। सभी मजदूर औरंगाबाद जिला के दाउदनगर के बताए जाते हैं।
सड़क निर्माण के लिए आये थे फंस गए है
वृद्ध मुखिया मानिकचंद राम ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि ठेकेदार नंद जी पांडेय उर्फ नंद बाबा तथा उनके मुनीब प्रवीण पाण्डेय के कहने पर यहां सड़क निर्माण कार्य के लिए अपने गांव से 19 मार्च को मजदूरी के लिए बुलाया गया था। दो तीन काम किया था। लेकिन कोरोना वायरस को लेकर 24 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लॉक डाउन करा दिया गया। जिसके कारण ना हीं हमलोग अपने गांव लौट पा रहे हैं और ना हीं खर्चे के अभाव में अपने लिए दो जून की रोटी की जुगाड़ कर पा रहे है। सभी कामकाज बंद हो गया है। इस तरह से 9 पुरुष, 6 महिलाएं तथा उनके 9 मासूम बच्चों सहित कुल 24 जिंदगियां स्कूल के चाहरदीवारी में कैद होकर स्वयं को असहाय तथा लाचार महसूस कर रहे हैं।
प्रशासन से घर वापसी कराने की गुहार
मजदूरों ने बताया कि सड़क निर्माण कार्य बंद होने के कारण परिवार को खाने की आफत आ गयी। एक स्कूल के कमरा में हमलोग एक तरह से कैद हो गए है। मासूम बच्चें खाने के लिए बिलबिला रहे है। संवेदक व मुंशी बीच मंझधार में छोड़ कर भाग खड़े हुए है। पुलिस प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से मदद की आस लगाए हुए है। वही मजदूरों का कहना है कि पुलिस प्रशासन द्वारा हमलोग को उनके गांव वापसी की मदद की गुहार लगा रहे है। घर परिवार के लोग बेचैन है। वहां भी बच्चों को छोड़ कर आये है। बच्चें बिलख रहे है।लचर दौर से गुजर रहे इन मजदूरों ने कहा कि अब तो उनके पास ना हीं अनाज हैं, और ना हीं नगद पैसे बचे हैं। ऐसे में यहां रह कर लॉक डाउन के दौरान भूखे रहना काफी मुश्किल हो गया। ऐसे में उनके नादान व मासूम बच्चों को भी भूखमरी तथा महामारी का खतरा है।
संवेदक से नहीं हुआ संपर्क
प्राप्त जानकारी के अनुसार संवेदक रुद्रनंद पांडेय (तिरुपति बालाजी कंस्ट्रक्शन, एनएच 2 रोड मोहनिया) द्वारा यहां सड़क काम चल रहा है, मगर संवेदक को निरंतर फोन करने के बावजूद सामने से कोई रिस्पांस नहीं मिला।
बोले बीडीओ
इस संबंध में पूछे जाने पर बीडीओ मयंक कुमार सिंह ने बताया कि इस विषय से अवगत उन्हें स्थानीय पंचायत के मुखिया अमरेंद्र प्रताप उर्फ चट्टान सिंह द्वारा जानकारी दी गयी है। संवेदक की लापरवाही के वजह से ऐसा हुआ है। हालांकि किसी भी हालत में सभी मजदूरों को वह भूखे नहीं मरने देंगे।
बोले कार्यपालक अभियंता
इस संबंध में ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता शशि सिंह ने मजदूरों के इस समस्या से अवगत होते हुए कहा कि संवेदक द्वारा मजदूरों को बगैर कोई सुविधा दिए बीच मझधार में छोड़ना काफी निंदनीय है, इस मामले की बारीकी से जांच करने के बाद दोषी संवेदक के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी, वहीं विद्यालय में लॉक डाउन हुए सभी मजदूरों को खाद सामग्री सहित उनसे संबंधित सभी जरूरतमंद सामानों की मुहैया कराई जाएगी तथा जिलाधिकारी को भी मजदूरों की परेशानी से अवगत करा कर उनसे परामर्श ली जाएगी।

