मां मुंडेश्वरी की हुई विशेष निशा पूजा, जयकारे से गूंजा पवरा पहाड़ी, इस देश से लाए गए फूलों से हुआ श्रृंगार और सजावट

अष्टमी और नवमी तिथि को डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने टेका मत्था, दर्शन पूजन

रंग बिरंगी लाइटों, फूलों से सजाया गया था मंदिर, परिसर, धाम, नवरात्रि में देश के कोने कोने से पहुंचे श्रद्धालु 

यहां मां के दरबार में बकरे की होती है जिंदा बलि

भभुआ कैमूर (बंटी जायसवाल)। कैमूर जिले के भगवानपुर प्रखंड के रामगढ़ के पवरा पहाड़ी की चोटी पर देश के अति प्राचीन मंदिरों में शुमार माता मुंडेश्वरी का मंदिर है। जहां सालों भर मां के दरबार में श्रद्धालु पहुंचते है।लेकिन शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि में काफी भीड़ लगता है।इन दिनों चैत्र नवरात्रि में माता मुंडेश्वरी के दरबार में दर्शन पूजन,मत्था टेंकने देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भक्त पहुंच रहे है। बुधवार और गुरुवार को नवरात्रि के अष्टमी और नवमी तिथि को माता मुंडेश्वरी के दरबार में डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन पूजन किया।

 मां मुंडेश्वरी धाम में नवरात्रि में पहले दिन से ही काफी भीड़ लगा रहा है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था एवं सुविधाओं का धार्मिक न्यास परिषद खास ख्याल रखा जा रहा है ताकि किसी भी प्रकार की श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। अष्टमी और नवमी को श्रद्धालुओ की दर्शन को लंबी लंबी कतारें लगी रही। बारी बारी से श्रद्धालुओ द्वारा पूजन किया गया।

मध्य रात्रि में हुआ मां का विशेष पूजा, आरती
अष्टमी की मध्य रात्रि में मां मुंडेश्वरी का प्रधान पुजारी सहित पुजारियो द्वारा विशेष आरती पूजा किया गया। जो साल सिर्फ एक बार चैत्र नवरात्रि में होती है। इस दौरान अष्टमी की रात में रातभर श्रद्धालुओ की दर्शन पूजन के लिए मंदिर खुला रहा। मां का थाइलैंड,कोलकाता, बैंगलोर, दिल्ली से लाए फूलो से विशेष श्रृंगार कोलकाता से आए हुए कारीगर द्वारा किया गया था। इसके साथ मां के मंदिर को फूलों और रंग बिरंगी कृत्रिम झालर, बत्ती,लाइटों से सजाया गया था।
 अष्टमी की रात में भी दर्शन पूजन के लिए भीड़ लगी रही। बताया जाता है कि अष्टमी की रात निशा पूजा में भाग लेने से मां सभी मनोकामनाए पूरी करती है। मां मुंडेश्वरी के दरबार में अष्टमी की रात दर्शन पूजन के लिए सीढ़ियों और सड़क मार्ग से पहुंचे। जहां दूधिया रोशनी में चारो तरफ जगमग जगमग दिख रहा था। मां से जयकारे से पवरा पहाड़ी गुंजायमान हो रहा था। वही नवमी को भी श्रद्धालुओ द्वारा मत्था टेक कर दर्शन पूजन किया गया।
सुरक्षा के थे पुख्ता इंतजाम
मां मुंडेश्वरी धाम में नीचे से लेकर ऊपर मंदिर तक अष्टमी की रात में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के साथ पुलिस बल के जवान थे। मंदिर परिसर में भगवानपुर थानाध्यक्ष अनिल प्रसाद ने पुलिस जवानों के साथ कमान संभाल रखे थे।
जगह जगह प्वाइंट पर पुलिस पदाधिकारी और जवान तैनात रहे।
अष्टकोणीय है मां का मंदिर
 बता दें कि माता मुंडेश्वरी का मंदिर देश के प्राचीन मंदिरों में शुमार है। यह अष्टकोणीय मंदिर है। यहां माता के दरबार में एक ऐसी अनूठी प्रथा है। इसके बारे में अगर आप नहीं जानते होंगे तो आज हम आपको माता के दरबार में इस अनूठी प्रथा के बारे में बताएंगे।जो वर्षो से मां मुंडेश्वरी मंदिर में बकरे की बलि अनूठी प्रथा चली आ रही है। 
जिंदा होती है बकरे की बलि 
यहां मन्नत वाले बकरे की जिंदा बलि मां स्वीकार करती है। मां मुंडेश्वरी मंदिर के प्रधान पुजारी उमेश मिश्रा ने बताया कि बकरे की बलि के लिए 72 रूपये का रसीद कटवाना पड़ता है। इसके मंदिर में मन्नत वाले बकरे को मां के सामने ले जाया जाता है। इसके बाद मां के चरणों का पुष्प और अक्षत पुजारी मंत्र से साथ बकरे पर मारते है। 
बकरा बेहोश हो जाता है। फिर मां का नाम लेकर चावल का अक्षत और पुष्प डालते ही बकरा जिंदा हो जाता है। जिसके बाद मान ली जाती है मां ने बलि से स्वीकार कर ली। बलि के दौरान एक बूंद खून नहीं गिरता है। ऐसा और कही नहीं देखने को मिलता है।

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