इस आवासीय विद्यालय के छात्राओं ने वार्डन पर समय से खाना नहीं देने का लगाया आरोप
चैनपुर से नीरज राजपूत की रिपोर्ट
चैनपुर से नीरज राजपूत की रिपोर्ट
# चैनपुर के कस्तूरबा आवासीय विद्यालय का मामला
चैनपुर. प्रखंड ने जगरिया स्थित कस्तूरबा आवासीय विद्यालय के छात्राओं को भर पेट खाना भी नसीब नहीं होता है. यहां न कभी मेनू से खाना बनता है और नही समय से. ये कहना है चैनपुर के जगरिया स्थित कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में अध्ययनरत छात्राओं का. छात्राओं का कहना है कि कभी भी उन्हें समय से वे भरपेट खाना नहीं दिया जाता है और इसकी शिकायत करने पर वार्डन द्वारा नाम काटकर घर भगा देने की बात कही जाती है. अपने इस समस्या को लेकर लगभग एक दर्जन से अधिक छात्राएं शनिवार को प्रखंड मुख्यालय पहुंची. उन्होंने विद्यालय पर संगीन आरोप लगाए. छात्राओं ने बताया कि उन्हें कॉपी-कलम भी तीन से चार माह में एक बाद देकर कोरम पूरा किया जाता है. जबकि इसके लिए सरकार द्वारा इसके लिए प्रतिमाह राशि दिया जाता है.
- भोजन में कई जाती है कमी
कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में क्षेत्र के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व पिछड़ा वर्ग की नब्बे से अधिक छात्राएं वर्तमान समय में यहां रह रहीं. शैक्षणिक व आर्थिक रूप से पिछड़े अनु जाती, अनु जनजाति व पिछड़े वर्ग के बच्चियों को शिक्षित करने, शैक्षणिक माहौल देने व उन्हें सभी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराया जा सके. इसके लिए सरकार द्वारा इन्हें कस्तूरबा विद्यालय में नामांकन कराकर पौष्टिक भोजन व उचित उचित माहौल दिया जा रहा है. इनके पढ़ाई के लिए कस्तूरबा विद्यालय को संस्कृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय से जोड़ा गया. जहां सभी छात्राएं प्रतिदिन आकर शिक्षा प्राप्त करतीं हैं. छात्राओं ने बताया कि वे कभी भी भरपेट भोजन कर स्कूल नहीं जाते हैं क्योंकि उन्हें कभी भरपेट भोजन नहीं दिया जाता है. उन्होंने कहा कि कभी-कभी तो बिना खाए ही विद्यालय जाना पड़ता है और पूरे दिन भूखे रहने पड़ता है.
- वार्डन से दशहत में ही छात्राएं
छात्राओं के मुताबिक सुबह सात बजे चना और गुड़ देना है जो आठ बजे मिलता लेकिन सिर्फ चना ही मिलता है. उन्होंने बताया कि आठ से नौ बजे के बीच नाश्ता का समय होता है. लेकिन नाश्ता कभी भी ग्यारह बजे से पहले नहीं मिला है. जबकि उन्हें समय से स्कूल जाना होता है. छात्राओं ने दोपहर के भोजन के बारे में बताया कि वो दो बजे के स्थान पर पांच बजे दिया जाता है और जो शाम ने हल्का नाश्ता मिलना चाहिए उसे वार्डन गोल कर देतीं हैं. रात्रि भोजन के सवाल पर छात्राओं ने बताया कि रात्रि भोजन 8 से 9 के बीच देना है जो रात के ग्यारह बजे के बाद मिलता है. उन्होंने बताया कि इतनी रात को भोजन मिलने के कारण ज्यादातर छत्राएँ भूखे ही सो जातीं हैं. छात्राओं ने बताया कि ये कई साल से जारी है जिसपर प्रखंड से लेकर जिला तक के किसी भी पदादिकारी की नजर नहीं पड़ती. छात्राओं में वार्डन की इतनी दहशत है कि वे अखबार में नाम छपने के बात पर उनके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगती हैं. उन्होने नाम न छापने के शर्त पर एक स्वर में वार्डन पर आरोप लगाया कि उनसे जब भी समय से खाना बनवाने की बात कही जाती है तो वे नाम काट भगा देने की धमकी देतीं है और कहतीं है कि जिसको जहां भी शिकायत करनी है. करे उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता.
- बोली वार्डन
इस बाबत जब वार्डन आशा सिंह से पूछा गया तो उन्होंने एक बात तो कुबूल की कि आज एक रसोइया के नहीं रहने के कारण बच्चियों को एक एक रोटी ही मिल पाई है. लेकिन उनके द्वारा अन्य आरोपों को खारिज करते हुए कहा गया कि यहां भोजन समय से वे मीनू के अनुसार ही बनता है. अब कौन सही कह रहा है और कौन झूठ बोल रहा है. ये तो जांच के बाद ही सामने आएगा. लेकिन इसकी जांच कौन करेगा और कब करेगा ये किसी को पता नहीं है.
- बोले बीडीओ
कस्तूरबा विद्यालय के छत्राओं के इस आरोप पर प्रखंड विकास पदाधिकारी ने बताया कि इस मामले की जांच की जाएगी और उन्हीने दोषी पाये जाने वाले हर एक व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाई की बात कही.
फ़ोटो - प्रखंड मुख्यालय पर समय से भोजन नहीं मिलने की शिकायत लेकर पहुंची कस्तूरबा विद्यालय की छात्राएं
- भोजन में कई जाती है कमी
कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में क्षेत्र के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व पिछड़ा वर्ग की नब्बे से अधिक छात्राएं वर्तमान समय में यहां रह रहीं. शैक्षणिक व आर्थिक रूप से पिछड़े अनु जाती, अनु जनजाति व पिछड़े वर्ग के बच्चियों को शिक्षित करने, शैक्षणिक माहौल देने व उन्हें सभी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराया जा सके. इसके लिए सरकार द्वारा इन्हें कस्तूरबा विद्यालय में नामांकन कराकर पौष्टिक भोजन व उचित उचित माहौल दिया जा रहा है. इनके पढ़ाई के लिए कस्तूरबा विद्यालय को संस्कृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय से जोड़ा गया. जहां सभी छात्राएं प्रतिदिन आकर शिक्षा प्राप्त करतीं हैं. छात्राओं ने बताया कि वे कभी भी भरपेट भोजन कर स्कूल नहीं जाते हैं क्योंकि उन्हें कभी भरपेट भोजन नहीं दिया जाता है. उन्होंने कहा कि कभी-कभी तो बिना खाए ही विद्यालय जाना पड़ता है और पूरे दिन भूखे रहने पड़ता है.
- वार्डन से दशहत में ही छात्राएं
छात्राओं के मुताबिक सुबह सात बजे चना और गुड़ देना है जो आठ बजे मिलता लेकिन सिर्फ चना ही मिलता है. उन्होंने बताया कि आठ से नौ बजे के बीच नाश्ता का समय होता है. लेकिन नाश्ता कभी भी ग्यारह बजे से पहले नहीं मिला है. जबकि उन्हें समय से स्कूल जाना होता है. छात्राओं ने दोपहर के भोजन के बारे में बताया कि वो दो बजे के स्थान पर पांच बजे दिया जाता है और जो शाम ने हल्का नाश्ता मिलना चाहिए उसे वार्डन गोल कर देतीं हैं. रात्रि भोजन के सवाल पर छात्राओं ने बताया कि रात्रि भोजन 8 से 9 के बीच देना है जो रात के ग्यारह बजे के बाद मिलता है. उन्होंने बताया कि इतनी रात को भोजन मिलने के कारण ज्यादातर छत्राएँ भूखे ही सो जातीं हैं. छात्राओं ने बताया कि ये कई साल से जारी है जिसपर प्रखंड से लेकर जिला तक के किसी भी पदादिकारी की नजर नहीं पड़ती. छात्राओं में वार्डन की इतनी दहशत है कि वे अखबार में नाम छपने के बात पर उनके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगती हैं. उन्होने नाम न छापने के शर्त पर एक स्वर में वार्डन पर आरोप लगाया कि उनसे जब भी समय से खाना बनवाने की बात कही जाती है तो वे नाम काट भगा देने की धमकी देतीं है और कहतीं है कि जिसको जहां भी शिकायत करनी है. करे उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता.
- बोली वार्डन
इस बाबत जब वार्डन आशा सिंह से पूछा गया तो उन्होंने एक बात तो कुबूल की कि आज एक रसोइया के नहीं रहने के कारण बच्चियों को एक एक रोटी ही मिल पाई है. लेकिन उनके द्वारा अन्य आरोपों को खारिज करते हुए कहा गया कि यहां भोजन समय से वे मीनू के अनुसार ही बनता है. अब कौन सही कह रहा है और कौन झूठ बोल रहा है. ये तो जांच के बाद ही सामने आएगा. लेकिन इसकी जांच कौन करेगा और कब करेगा ये किसी को पता नहीं है.
- बोले बीडीओ
कस्तूरबा विद्यालय के छत्राओं के इस आरोप पर प्रखंड विकास पदाधिकारी ने बताया कि इस मामले की जांच की जाएगी और उन्हीने दोषी पाये जाने वाले हर एक व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाई की बात कही.
फ़ोटो - प्रखंड मुख्यालय पर समय से भोजन नहीं मिलने की शिकायत लेकर पहुंची कस्तूरबा विद्यालय की छात्राएं
