जीवन में खुशियां भरने वाला रंगो का त्योहार होली आज, होलिका सम्पन्न,जाने क्या हुआ

फ़ोटो - होलिका जलता हुआ 
कैमूर लाइव न्यूज़ से बंटी जायसवाल
रामपुर/ रजनीकांत दूबे
रामपुर/ कैमूर. जीवन को रंगीन बनाने में रंगों का विशेष महत्व होता है, इसी कारण से होली का पर्व हर किसी का पंसदीदा होता है. यह पर्व सभी के जीवन में खुशियां और रंग भर देता है. जीवन को रंगीन बनाने के कारण इस पर्व को रंग महोत्सव भी कहा जाता है. जो आज यानी शुक्रवार को मनाया जायेगा. वही गुरुवार को होलिका दहन शांति पूर्ण संपन्न हुआ. होली के त्योहार को एकता ,प्यार और सद्भावना का प्रतीक भी माना गया है. यह एक पारंपरिक और सांस्कृतिक हिंदू त्योहार है. परंपरागत रुप से होली के पर्व को बुराई पर अच्छाई की सफलता का प्रतीक माना जाता है. यह पर्व हिंदुओं का महत्वपूर्ण पर्व है, मान्यताओं के अनुसार इस दिन होलिका जलाई जाती है और अगले दिन रंगों से होली खेली जाती है. होली को मनाने के ऐसे तो कई कारण हैं लेकिन सबसे अधिक महत्वता पौराणिक तथ्यों को दी जाती है.
हिंदू कैलेंडर (विक्रम संवंत) के अनुसार होली महोत्सव फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. फाल्गुन को चंद्र मास भी कहा जाता है, इस माह के अंतिम दिन पर नए मौसम के स्वागत की खुशी में मनाया जाता है. इसी कारण से इसे मौसमीय त्योहार भी माना जाता है. होली शब्द ‘होला’ से उत्पन्न हुआ है जिसका अर्थ अच्छी फसल प्राप्त करने के लिए भगवान का पूजन करना है. इस दिन नई और स्वस्थ्य फसल पाने के लिए पूजा की जाती है. होली का त्योहार होलिका दहन को भी इंगित करता है.माना जाता है कि जो भक्त प्रहलाद की तरह भगवान के प्रिय हैं उनकी रक्षा होगी और होलिका जैसे पापी हैं उन्हें दंडित किया जाएगा.
होली उमंग और उत्साह का त्योहार माना जाता है, इस दिन भगवान विष्णु के भक्त व्रत करते हैं और होलिकादहन के बाद व्रत पारण करते हैं. पवित्र अग्नि में विष्णु के नास से आहुति दी जाती है.होली का पर्व भारतवर्ष में अति प्राचीनकाल से मनाया जाता आ रहा है. इतिहास की दृष्टि से देखें तो यह वैदिक काल से मनाया जा रहा है हिंदू मास के अनुसार होली के दिन से नए संवत की शुरुआत होती है. इन सभी कारणों से रंगोत्सव मनाया जाता है.नरसिंह रुप में भगवान विष्णु ने इस दिन अवतार लिया था और हिरण्यकश्यप नामक महासुर वध करके भक्त प्रहलाद को दर्शन दिए थे.इस दिन रंग लगाकर सभी लोग आपस में खुशियां बांटते हैं.
फ़ोटो - होली गाते बच्चें व युवकों की टोली

- शांतिपूर्ण संपन्न हुआ होलिका दहन
आपसी भाईचारे और प्रेम की नई मधुरता घोलने वाले रंगोत्सव का त्योहार होली का आगाज गुरुवार की रात होलिका दहन के साथ हो गया. इसी के साथ कैमूर जिले के विभिन्न प्रखंड के गांवो में होली का उल्लास छाने लगा. होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 6:58 था, लेकिन 7 बजे के बाद से होलिका दहन शुरू हुआ. वही जिले के विभिन्न गांवों में रात 10 बजे तक होलिका दहन किया गया. चढ़ती रात के साथ ही साथ होलिका दहन का क्रम भी तेज होता गया. रात्रि 12.00 बजे के बाद प्रखंड के सभी जगहों पर होलिका दहन किया जा चुका था. होलिका दहन से पूर्व होलिका का विधि विधान पूजन किया गया. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होलिका को लाल सूत से बांधा गया. बतासा, गुड़, तिल, जौ और मिश्रित जड़ियां होलिका में डालने के बाद उसकी परिक्रमा की गई. जबकी प्रखंड क्षेत्र के अकोढ़ी, सबार, बेलाव, पसाई, खरेन्दा, करौंदा सहित कई गांव में रात 7 बजे के बाद होलिका दहन का क्रम शुरू हो गया. इससे पूर्व, होलिका की परंपरा का निर्वाह परिवारों में किया गया. मान्यता है कि होली के एक दिन पहले होलिका वाले दिन लोग अपने शरीर मे सरसों का उबटन लगाते है. इसके बाद उबटन को छोड़ा कर गोइठा पर रखा जाता है. इसके साथ ही होलिका को जलाने के लिए लोगों द्वारा लेड का पेड़ के टहनियों को काट कर जलाने वाला बनाया जाता है. इसमे पुआल बांधा जाता है. होलिका वाले समय लोग अपने घर से गोइठा और बांधे गये लेड को ले जाकर होलिका वाले आग में डालते है. 

# होलीका क्यों मनाया जाता है
दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने जप-तप से एक ऐसा वरदान प्राप्त किया था मैं दिन रात कभी नहीं मरु.  हिरण्यकश्यप के एक पुत्र प्रहलाद था. जो श्रीहरि का भक्त था. पिता चाहते थे कि सारी पूजा छोड़कर वह उसके आधिपत्य को स्वीकार करे. प्रहलाद ने यह स्वीकार नहीं किया. हिरण्यकशयप की बहन होलिका थी. उसे ब्रह्मा जी का वरदान था कि अग्नि भी उसका नुकसान नहीं कर सकती. वह प्रहलाद को गोदी में लेकर अग्नि में बैठी. होलिका जिस समय आग में बैठी थी उस समय अपने ऊपर चादर ली हुई थी लेकिन हवा की झोंके की चादर उड़ गया इसके बाद आग में जल कर भस्म हो गई.भक्त प्रहलाद को कुछ नहीं हुआ. अगले दिन होली मनायी जाती है.

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