गांवों में चूरा है प्रसिद्ध, मिल रही है चूरा की सोंधी महक, इस उद्योग को मिले बढ़ावा

कैमूर लाइव न्यूज से बंटी जायसवाल
भभुआ कैमूर। कैमूर में धान की फसल कट गयी। खेत खाली हो गए। खेतो में अब रबी फसल में गेहूं, चना, मसूर आदि की बुआई हो चुकी है। किसान धान की बोझे खलिहान में आने के बाद उसका दवनी होकर धान बन भी हो गया। किसान द्वारा धान को मिल में कुटाई करा कर चावल भी बनवा रहे है। वही एक ओर कैमूर में चूरा मिल (चूरा उद्योग) शुरू हो गया है। 
मकर संक्रांति के पहले से ही चालू हो जाता है यह उद्योग
यह उद्योग दिसंबर माह में धान तैयार होने के बाद शुरू हो जाता है। मकर संक्रांति के एक माह पहले से चुरा उद्योग गांवों में खूब चल रहा है। चूरा मिल कैमूर में एक छोटे उद्योग के रूप में चलता है। कैमूर के सभी प्रखंडों के दो चार गांवों में यह उद्योग चल रहा है। किसान का धान तैयार होने के बाद मकर संक्रांति आने के पूर्व धान से चूरा मिल पर ले जाकर कुटवाने लगते है। चूरा मिल शहर की अपेक्षा गांवों में ही चलता है।
चुरा की मिल रही है सोंधी खुशबू
मकर संक्रांति को ले चुरा उद्योग काफी तेजी से चल रहा है। चूरा मिल उद्योग लोगो की भीड़ को देखते हुए दिन रात चल रहा है।गांवों में चूरा मिल से सोंधी खुशबू महक से मिल रही है। चुरा उद्योग चलाने वाले संचालकों के कहना है कि मकर संक्रांति के एक माह पहले से यह मिल चालू हो जाता है। जो मकर संक्रांति आते आते है जोर पकड़ लेता है। इस समय यह उद्योग खूब चल रहा है। 
चुरा उद्योग को बढ़ावे की जरूरत
सबार गांव के चुरा मिल उद्योग संचालक विजय पासवान ने बताया गांवों में लोग अपने पैसे ही इस छोटे उद्योग को चलाते है। इस उद्योग को कैमूर में बढ़ावे की जरूरत है। इस उद्योग को गांवों में शुरू करने के लिए मदद की जरूरत होती है। जो नहीं मिल पाती है। इस उद्योग को चालू करने में शुरुआत में दो से तीन लोगो की जरूरत पड़ती है। इसके बाद लोगो की भीड़ देखते हुए और दिन रात चलने पर चलाने के लिए मजदूरों को बढ़ाना पड़ता है। 10 किलो धान कुटवाने पर 6 किलो चुरा तैयार होता है। 5 रुपये किलो चुरा कुटाई लिया जाता है। 
कम पूंजी में अच्छा फायदे, तीन माह में लाख रूपये
चुरा उद्योग संचालको का कहना है कि इस उद्योग में कम पूंजी में अच्छा फायदे है। इस उद्योग को चालू करने में कम से कम डेढ़ लाख की लागत आती है। इस तीन के सीजन में खर्चा काट कर पहली बार मे अपना पूंजी निकल जायेगी। अगर चुरा उद्योग मिल अच्छा चल गया तो फायदा भी होगा।
गांवों में घर घर मिल जायेगा चूरा
 ग्रामीण क्षेत्रों में धान से चुरा कुटवा कर उसे चुरा गुड़ के साथ चाव से खाते है। गांवों में बच्चे, जवान, बूढ़े सभी के घरो में इस समय चूरा मिल जायेगा। क्योंकि किसान के पास अपना धान होता है। उसे चुरा मिल पर ले जाकर कुटवा लेते है। गांवों में घर के सभी परिवार के लोग चूरा खाते है।
बच्चो को बेहद पसंद होता है चुरा गुड़
 खास कर सुबह में बच्चे चुरा गुड़ खाना बेहद पसंद करते है। लोगो का कहना है कि गांवों में अगर बच्चो को चुरा गुड़ खाने के लिए दे दिया जाए खाना भी नहीं खायेंगे चुरा गुड़ सब खा जायेगे। उन्हें चुरा गुड़ खाने में काफी अच्छा लगता है। चुरा गुड़ खाने में बहुत अच्छा लगता भी है। 
मकर संक्रांति पर चुरा दही खाते है लोग
गांवों में लोग मकर संक्रांति के पहले से ही धान से चुरा कुटवाने के बाद खाने लगते है। चुरा को गुड़ के साथ, दही,मट्ठा, दूध के साथ है। गांवों में लोग बड़े चाव से दही चूरा खाते है। क्योंकि गांवों में लोगो के घर में गाय भैंस रखते है। इनके दूध से दही तैयार हो जाता है। 
चुरा दही खूब मजे से लोग सुबह में नास्ते में रूप में कर लेते है। हां, कुछ भी जाये लेकिन मकर संक्रांति के दिन यानी खिचड़ी के दिन सुबह में स्नान के बाद चूरा दही जरूर खाते है। यह गांवों के साथ शहर के लोग भी खाते है। इसलिए लोग मकर संक्रांति के पूर्व ही दही और चुरा का तैयारी कर लेते है। 

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !
To Top