कैमूर लाइव न्यूज़ से बंटी जायसवाल
रामगढ़ के पहले बेलांव व मोहनिया थानों को फूंका गया था
भभुआ कैमूर। बिहार के कैमूर में तीन थाने को चार
बार हिंसक भीड़ के उपद्रवियों द्वारा जमकर तांडव मचाते हुए आग के हवाले किया जा चुका है। रामगढ़ थाना को 18 जनवरी 2019 को दलित युवती की मौत पर हिंसक भीड़ द्वारा फूंका गया है। इसके पहले वर्ष 2007 में बेलांव थाना को छात्र की मौत पर, मोहनिया थाना को दो बार फूंका गया है। पहली बार 2012 मे एक युवक की हत्या पर तो दूसरी बार 2016 में एक शिक्षक की हत्या में उपद्रवियों द्वारा थाने को आग के हवाले कर दिया गया था।
18 जनवरी 2019 दलित युवती की मौत पर बवाल,रामगढ़ थाने को फूंका
ताजा मामला रामगढ़ थाने फूंके जाने को लेकर है। रामगढ़ थाने को बड़ौरा गांव के एक दलित युवती की मौत पर बवाल मच गया। आक्रोशित लोग हिंसक होते हुए रामगढ़ में जमकर तांडव मचाते हुए रामगढ़ थाने के पुलिस वाहन, जब्त वाहनों के अलावा सड़क पर वाहनों को आग के हवाले कर दिया। उपद्रवियों द्वारा युवती के शव को रख कर दुर्गा चौक को जाम कर प्रदर्शन करते हुए रामगढ़ में आगजनी, तोड़फोड़ व पुलिस पर पथराव किया गया। हिंसक भीड़ द्वारा पुलिस को दौड़ा दौड़ा कर पीटा गया। इस हिंसक घटना में मोहनिया डीएसपी रघुनाथ सिंह, इंस्पेक्टर, मेजर सहित कई पुलिस अधिकारी व कर्मी घायल हो गए। इस घटना में 1 करोड़ का क्षति हुआ, एक दर्जन पुलिस अधिकारी व कर्मी घायल हो गए। 100 छोटे बड़े वाहनों को फूंक दिया गया। इस प्रकार की हिंसक घटना व थाने को फूंके जाने का पहला मामला नहीं है।
2007 में बेलांव थाने को फूंका जा चुका है
जानकार सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2007 में बेलांव थाना क्षेत्र के नौहट्टा हाई स्कूल के एक छात्र की बस से कुचल कर मौत के मामले में बेलांव थाने को हिंसक भीड़ द्वारा फूंक दिया गया था। इस दौरान भी पुलिस पर हिंसक भीड़ के उपद्रवियों द्वारा पथराव किया गया। इसके बदले में पुलिस द्वारा बचाव के लिए हवाई फायरिंग किया गया था। इस दौरान बेलाव में छात्र के शव को रख कर सड़क जाम किया गया था।8 घण्टे तक तांडव मचाते हुए आगजनी, पथराव व तोड़फोड़ उपद्रवियों द्वारा किया गया था।
2012 में मोहनिया थाना को युवक की हत्या पर फूंका
जानकार सूत्रों के मुताबिक, कैमूर में सबसे पहले 2007 में बेलांव थाने को उपद्रवियों द्वारा फूंके जाने के बाद दूसरा मामला वर्ष 2012 मोहनियां थाने को में एक युवक की हत्या के बाद हिंसक भीड़ के उपद्रवियों द्वारा फूंक दिया गया था।
2016 में शिक्षक की हत्या के बाद फूंका गया
मोहनिया के वर्ष 2012 वाले मामले कि अभी कार्रवाई चल ही रही थी कि वर्ष 2016 में एक शिक्षक की हत्या कर दी गई थी। जिसके बाद शिक्षक की हत्या पर आक्रोशितों भीड़ हिंसक होते हुए एक बार फिर मोहनियां थाने को आग के हवाले कर फूंक दिया गया। इस दौरान भी हिंसक उपद्रवियों द्वारा थाने में तोड़फोड़ आगजनी करते जब्त वाहनों को फूंक दिया गया था।

