![]() |
भभुआ/कैमूर(बंटी जायसवाल). सातवें चरण के लोकसभा चुनाव के सासाराम में लोकतंत्र का महापर्व में मतदान सुबह 7 बजे से शुरू हो गया. कैमूर के सभी मतदान केंद्रों पर संबंधित गांव के मतदाता वोट दे रहे थे. लेकिन कैमूर में एक ऐसा मतदान केंद्र था. जहां दो गांवो के बूथ होने पर एक गांव के एक भी मतदाता वोट देने के लिए नहीं पहुँचे. यह बूथ कैमूर के रामपुर प्रखंड के दियरी गांव स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में बना था. नाम नहीं छापने के शर्त पर प्रेजाइडिंग पदाधिकारी ने बताया कि इस बूथ पर दियरी व भुड़ली गांव के वोटरों को वोट करना था. लेकिन दियरी के वोटरों ने वोट किया और जबकि भुड़ली गांव के एक भी मतदाताओ ने वोट देने नहीं पहुँचे. इस बूूूथ पर कुल 597 मतदाता है. जिसमें दियरी के 335 और 262 भुड़ली गांव है. यह भी बताया कि 1 बजे तक दियरी के लगभग मतदाता ने वोट कर दिया है. वही भुड़ली के एक भी मतदाताओ ने वोट नहीं दिया. एजेंट विकास मिश्रा, अजय कुमार ने बताया कि इस बूथ पर भुड़ली गांव के मतदाताओ का इसके पहले बूथ नहीं बना था. इस बूथ से भुड़ली गांव लगभग 10 किमी दूरी पर दुर्गावती नदी के उस पार रोहतास में स्थित है. ऐसे में जानकारी के अभाव या इतनी दूरी होने के कारण यहां पर मतदाता नहीं पहुँचे. गौरतलब है कि भुड़ली गांव दुर्गावती जलाशय के डूब क्षेत्र में पड़ता था. वर्तमान भुड़ली गांव के विस्थापित परिवार को सरकार द्वारा दुर्गावती जलाशय के उत्तर में एक किमी की दूरी पर रोहतास में बादलगढ़ में बसाया गया है. ऐसे में सवाल सामने आता है कि जब भुड़ली गांव के लोग बादलगढ़ में बसे है तो उस गांव के मतदाताओ का बूथ 10 किमी की दूरी पर कैमूर के दियरी विद्यालय मतदान केंद्र पर कैसे बना दिया गया. बादलगढ़ से नजदीकी विद्यालय अदमापुर (करमचट) में बनाया जाना चाहिए था. ताकि भुड़ली गांव के मतदाता वोट कर सकते है. बताया जाता है कि भुड़ली गांव पहले दुर्गावती जलाशय के डूब क्षेत्र में कैमूर में ही पड़ता था. दियरी मतदान केंद्र पर दोपहर में सन्नाटा छाया हुआ देखा गया. दियरी मतदान केंद्र पर चुनाव के दौरान जायजा लेने पहुँचे सीओ भरतभूषण सिंह से पूछे जाने पर बताया कि मैं इसके बारे में कुछ नहीं बता सकता हूं, बीडीओ ही बता पायेंगे. जब बीडीओ अरविंद कुमार सिंह से फोन पर जानकारी लेना चाहा तो वे फोन रीसिव नहीं कर पाये.

