बिहार का एक ऐसा गांव, जहां एक हिंदू परिवार 40 वर्षो से रखते आ रहा है ताजिया, हिन्दू - मुस्लिम आपसी भाईचारे के साथ मुहर्रम मना पेश कर रहे है मिसाल

फ़ोटो - ताजिया के पास बाए में ताजिया रखने वाले राधेश्याम प्रसाद
भभुआ/कैमूर(बंटी जायसवाल). बिहार का एक ऐसा हिन्दू परिवार जो 40 वर्षो से रखते आ रहे है ताजिया, यह हिन्दू परिवार है बिहार के कैमूर जिले के भगवानपुर प्रखंड के बसंतपुर गांव में है. इस गांव के राधेश्याम प्रसाद व उनके पिता जी द्वारा 40 वर्षो मोहर्रम पर ताजिया को रखते आ रहे है. इस गांव में हिन्दू परिवार द्वारा ताजिया रखा जाता है. इसी ताजिया पर मुस्लिम परिवार के लोग में फातिहा पढ़ते है. राधेश्याम बताते है कि मेरे पिता जी 40 वर्षो पहले अपनी समस्या को लेकर फकीर के पास गए तो उनके बताने पर ताजिया रखने लगे. जैसे मुस्लिम परिवार के लोग ताजिया रख कर इबादत व फातिहा करते है. उसी तरह वह करते थे. फिर बाद में पिताजी का देहांत होने के बाद मैं वर्षो चल रही परम्परा को निभाते हुए आ रहा हूं. यह भी बताया कि इस गांव हिंदू व मुस्लिम परिवार के दोनों लोग आपसी भाईचारे के साथ ताजिया जुलूस को निकाल कर मातम करते हुए इमामबाड़े में ले जाकर ताजिया को पहलाम कर देते है. यह भी ताजिया शोक का मातम का पर्व है. क्योंकि इसी दिन या अली और हुसैन दोनों भाई इराक में यहूदियों के साथ शहीद हुए थे. उनके याद में ही ताजिया मनाया जाता है. मोहर्रम के 10 वी को जैसे मुस्लिम परिवार के लोगों के घर पर न तो चूल्हा जलता है और न ही खाना बनता है उसी प्रकार मेरे घर पर भी होता है. ताजिया के पहलाम होने के बाद रात को खीचड़ा बनता है.इसके बाद उसी को खाते है.
हम लोगों को समाज में संदेश देना चाहते है हिंदू मुस्लिम या कोई भी समुदाय के हो उन्हें आपसी भाईचारे व प्रेम के मिल जुल कर सुख शांति रहना है. आपसी मतभेद नहीं रखना चाहिए. वही इस गांव के वार्ड सदस्य सैय्यद अंसारी का कहना है कि 20 वर्षो से राधेश्याम प्रसाद ताजिया को रखा जा रहा है इसके बाद हमलोगों ताजिया को रखना छोड़ दिया और इन्ही के साथ मिल कर आपसी भाईचारे व प्रेम ताजिया जुलूस निकालते है. यह अपने आप मे धार्मिक भाईचारे का मिसाल कर रहा है.

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