इस गांव के पुल पर दो राज्यों के ताजिया का हुआ मिलन, पारंपरिक खेल में खिलाड़ियों ने कला का किया प्रदर्शन

दुर्गावती/कैमूर. दुर्गावती प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत दसवीं मोहर्रम मंगलवार को करीब डेढ़ दर्जन जगहों पर हजरत इमाम हुसैन की याद में जुलूस के साथ ताजिया निकाले गए। सैकड़ों वर्ष पुरानी परंपरा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मंगलवार की अहले सुबह नौबतपुर स्थित कर्मनाशा नदी पुल पर  मुहर्रम के दसवीं तारीख को यूपी बिहार के तीन ताजीयों के मिलन का रस्मो रिवाज की परंपरा कायम हुई.इस अवसर पर सैकङों की संख्या मे यूपी के नौबतपुर एवं बिहार के खजुरा सरैयां के हिन्दु मुस्लिम बन्धुओं ने  शामिल होकर आपसी मुहब्बत व भाईचार की मिशाल पेश की। तथा या हुसैन की नारों की गूंज के साथ इमाम हुसैन की याद में नौहा ख्वानी पढ़ी गई.ऐ खुदा अंधेर कैसा हो गया इस चांद में, फातमा का लाडला मारा गया।उन्ही की याद में मोहर्रम के महीने में गमगीन माहौल में ताजिया जुलूस निकाला जाता है।
रिवाजों के अनुसार दुर्गावती प्रखंड के खजुरां व सरैया तथा यूपी के नौबतपुर गांव का ताजिया विशाल जुलूस के साथ नौवीं मुहर्रम को अपने चौक से उठकर  जीटी रोड से होते हुए यूपी बिहार सीमा के कर्मनाशा नदी पुल पर पहुंचता है.जहां पर या हुसैन के नारों के बीच तीनों ताजिया का मिलन होता है। साथ ही यूपी बिहार से आने वाले लोग भी आपस में गले मिलकर  आपसी भाईचारा को मजबूत करते हैं। और काफी देर तक नौहा ख्वानी की सदाएं गूंजती रहती है ।नौहा ख्वानी सुनकर लोग लोगों के दिलों में कर्बला की दास्तान तरोताजा हो जाता है.उसके बाद बिहार के दोनों ताजिये  के साथ लोग नौबतपुर के ताजिए को चौक तक पहुंचाते हैं।  वहां पर मुंह मीठा करने के बाद बिहार का दोनों ताजिया अपने अपने चौक पर लौट जाता है.फिर दोपहर एक बजे नौबतपुर का ताजिया सरैया चौक पर आता है ।
यहां पर यूपी के लोगों का मुंह मीठा किया जाता है। यहां से दोनों ताजिया एक साथ खजुरा चौक पहुंचता है।  वहां से तीनों ताजिया एक साथ खजुरा पड़ाव पहुंचता है। शाम ढलने के बाद तीनों ताजिया कर्मनाशा नदी पुल पर पहुंचकर मिलन करने के बाद अपने अपने कर्बला को प्रस्थान कर गये। जहां पर तीनों अखाड़े के लोग जमकर लकड़ी, गेदका, तलवार आदि खेल का जमकर प्रदर्शन करते हैं.जहां पर रात्री आठ बजे तक ताजिए को ठंढा किया किया है. हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी यहां पर यह रस्म लोगों के आपसी मिल्लत के साथ पूरी हुई।

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