हेलमेटमैन राघवेंद्र नये साल से सड़क दुर्घटना में मृतक के परिवार को देंगे 5 से 10 लाख की सहायता राशि

#पुरानी पुस्तक देकर इस मिशन योजना का बन सकते है हिस्सा
#5 -25 साल छात्र छात्राओं का रजिस्ट्रेशन कराने के बाद मिलेगा लाभ
भभुआ/कैमूर(बंटी जायसवाल). हेलमेट मैन राघवेंद्र कुमार नए साल से हेलमेट बांटने के बजाय सड़क दुर्घटना में मरने वाले छात्र छात्राओं के मृतक परिवार को 5 लाख से 10 लाख की सहायता राशि देंगे. वह अपने मिशन के तहत पीड़ित परिवार का बेटा बन कर आंसू पोछने का निर्णय लिया है. आपको बता दें कि हेलमेट मैन राघवेंद्र बिहार के कैमूर जिले के रामगढ़ प्रखंड के बगाढ़ी गांव के रहने वाले है. जो विगत 5 सालों से शिक्षा व सड़क दुर्घटना में जागरूकता के लिए हेलमेट का वितरण करते आ रहे है. लेकिन अब हेलमेट मैन राघवेंद्र द्वारा नया साल 2020 से एक नया अभियान की शुरूआत करने वाले है. हेलमेटमैन राघवेंद्र कुमार ने बताया कि बिहार के जो छात्र छात्रा दूसरे राज्यों में पढ़ाई करते है और उनकी सड़क दुर्घटना में मौत हो जाती है तो उनके परिवार को 5 लाख से 10 लाख की सहायता राशि देंगे. 5 लाख की सहायता राशि छात्र के परिवार को तो 10 लाख की सहायता राशि छात्रा को दी जाएगा. यह सहायता राशि हेलमेट मैन के फाउंडेशन से उन छात्र छात्राओं का रजिस्ट्रेशन कराने के बाद फाइनेंस कराते हुए देंगे.
दिल्ली से मिशन की शुरुआत
हेलमेटमैन ने बताया कि नये साल के अवसर पर 2 जनवरी को दिल्ली एनसीआर के अंदर ग्रेटर नोएडा साईं मंदिर डेल्टा थर्ड के पास जो हेलमेट लगाकर दर्शन करने आएगा वह इस लिस्ट में शामिल होगा. उसे अपना आधार नंबर के साथ पूरी डिटेल देनी होगी. 3 जनवरी को नॉलेज पार्क मस्जिद के पास जो हेलमेट लगाकर नमाज के लिए आएगा उसे इस योजना का लाभ मिलेगा. उन्हें अपना आधार नंबर के साथ पूरी डिटेल्स देना होगा.
सहायता राशि के लिए देना होगा पुरानी पुस्तक व रजिस्ट्रेशन
हेलमेटमैन राघवेंद्र कुमार ने बताया कि यह मिशन बिहारवासियों छात्र छात्राओं को को ही मिलेगा. मेरे मिशन के लाभ लेने के लिए पुरानी पुस्तक देकर इस राशि का दुर्घटना होने पर लाभ ले सकता है. इसके लिए छात्रों की उम्र 5 साल से 25 साल के अंदर के होना चाहिए. उन्ही छात्र छात्राओं को इसका लाभ मिलेगा. नए साल 26 जनवरी से हेलमेट मैन की वेबसाइट पर बिहार के कोई भी छात्र छात्रा मैट्रिक व इंटरमीडिएट पास अपना नाम रजिस्टर्ड कर सकता है. हेलमेट मैन अब तक सड़क जागरूकता अभियान के तहत 25 हजार लोगों हेलमेट दे चुके है. शिक्षा के लिए 2 लाख छात्र छात्राओं को निःशुल्क किताबें दे चुके हैं.उन्होंने बताया कि भारत में प्रतिवर्ष डेढ़ लाख सड़क दुर्घटना में लोगों की मौत होती है. इनमें ज्यादातर छात्र ही होते है.
सड़क दुर्घटना में मौत का कारण जागरूकता में कमी
भारत सरकार द्वारा नए नियम लागू करने से जितना राजस्व में बढ़ोतरी हुई है लेकिन सड़क दुर्घटना में होने वाली मौत को रोकने में असफल दिखाई दे रही है. इसका सबसे बड़ा कारण है लोगों में जागरूकता की कमी है.इसलिए बड़े पैमाने पर बच्चों के माता-पिता को जागरूक करने का संकल्प लिया गया. भारत में 80% सड़क दुर्घटना में मरने वाले युवा और बच्चे होते हैं. अधिकतर बच्चे अपने माता पिता के घर का चिराग होते हैं.आज भारत के अंदर हर माता-पिता महंगी से महंगी शिक्षा देने के लिए कर्ज लेकर देने का प्रयास करते हैं.
दोस्त की मौत के जागरूकता का संकल्प
हेलमेटमैन ने बताया कि 5 साल से जागरूकता के साथ सड़क दुर्घटना से मरने वाले सैकड़ों परिवार से भी मिले. जो परिवार अपना बेटा खोने के बाद इतना टूट चुका होता है. अपने इलाज के लिए पैसे का मोहताज हो जाता है. समाज में कोई भी इंसान अफसोस के अलावा ऐसे परिवार को पैसे का सहयोग नहीं देता है. आज इसी समस्या को मेरे दोस्त कृष्ण कुमार ठाकुर के माता पिता मोहताज हो गए हैं पैसे के लिए जो इलाज कराने के लिए पैसे नहीं है. मेरे दोस्त का सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी थी. जिसके बाद मैंने बिना हेलमेट बाइक चलाने वाले को सड़क दुर्घटना से बचाने के लिए जागरूक करने के लिए संकल्प लिया था. जो विगत 5 साल से लगातार जागरूकता किया जा रहा है. अब उस परिवार को मदद करना चाहते हैं जो परिवार इस घटना से अनजान है. भारत के करोड़ों परिवार में जागरूकता का संदेश देकर ऐसी विपत्ति में करोड़ों मां का आंसू पोछने के लिए नए साल पर सौगात देने का संकल्प लिया है.

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