भभुआ/कैमूर/बंटी जायसवाल की रिपोर्ट
क्या आप शुगर/डायबिटीज/मधुमेह के मरीज है या आप के कोई रिश्तेदार है। अगर हां तो आपको चावल खाने के लिए डॉक्टर द्वारा मनाही होगी। क्योंकि शुगर मरीजो को चावल,आलू,चीनी मीठाई आदि समान खाना आपको परेशानी में डाल सकता है। आपका शुगर लेवल बढ़ा देगा जो काफी घातक भी सिद्ध होता है। बाजार में शुगर फ्री चाय,दवा व अन्य सामान आ चुकी है। जो शुगर मरीज उपयोग भी करते है। लेकिन वे अपने खाने में चावल खाने व उसके सोचने भी डरते है। क्योंकि चावल खाने से शुगर बढ़ जाता है। लेकिन आपके लिए खुशखबरी है। अब आप चावल खा सकते है वह भी शुगर फ्री चावल। जो बाजार में आ गया है। आज हम आपको बताने जा रहे है। कहाँ कहाँ शुगर फ्री चावल उपजाया जा रहा है। अब बाजार में सुगर फ्री धान भी आ गया है। जिसे किसानों द्वारा उपजाया जाने लगा है।
भगवानपुर प्रखंड के बखारबांध गांव के किसान ने उपजाया शुगर फ्री धान
ऐसा ही एक किसान है कि जो कैमूर में अलग प्रकार के धान को उपजाया है। जो शुगर फ्री धान है। यह किसान है कैमूर के भगवानपुर प्रखंड के जैतपुर कलां पंचायत के बखारबाँध के रामनिवास सिंह है। जिन्होंने मधुमेह रोगियों के लिए ऐसे धान को उपजाया है जिसे भोजन के रूप में खाने पर किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होगा। उस धान का नाम है काला नमक(काला धान)। जिसे शुगर फ्री धान कहा जाता है। जो मधुमेह रोगियों के लिए काफी फायदेमंद होगा।
अब डायबिटीज मरीज भी खा सकते चावल
मधुमेह रोगी यानी शुगर पेसेंट बेहिचक ब्लैक राइस काला धान का चावल अपने भोजन में ले सकते है। कैमूर में यह शुगर फ्री धान हर कही नहीं उपजाया जा रहा है और न ही ज्यादातर किसानों को जानकारी ही है। कैमूर के कुछ किसानों द्वारा खेती की जा रही है। यहां तक की कृषि विभाग को भी उतना जानकारी इसके बारे नहीं है। किसान द्वारा काला धान की खेती के अलावा ब्रोकली गोभी की भी अपने खाने के लिए खेती करते है। जिसका सब्जी व सलाद के रूप में उपयाग करते है। जिसमें विटामिन काफी मात्रा में मिलता है।
यूपी से किसान ने लाया शुगर फ्री काला नमक धान की बीज व की खेती
किसान रामनिवास सिंह ने बताया कि मैं यूपी में एक रिश्तेदारी में गया था तो देखा कि वहां काला धान की खेती की जा रही थी। जो शुगर फ्री है। उस दौरान मुझे जानकारी होने पर मैंने तीन किलो काला धान 700 रुपये प्रति किलो की दर से 2100 रुपये खरीदा था। उस तीन किलो बीज को 1 बीघे खेती में काला धान के बीज को लाकर जून जुलाई में बुआई किया था। इस काले धान का खेती करने पर 8-10 क्विंटल दर जाता है। अभी मैं अपने घर पर धान की कुटाई करा कर उसका भोजन के रूप में खाने में प्रयोग करते है। और बेच भी सकते है। लेकिन इसका 4000 -4500 रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा ही हो सकता है।उन्होंने किसानों के लिए कहा कि अगर किसान काला नमक शुगर फ्री धान की खेती करते है तो उनके काफी फायदा उन्हें अन्य धान की अपेक्षा अच्छा कीमत मिलेगा।
जैविक खाद से करते है खेती
किसान ने बताया कि मैं खेती जैविक खाद से करता हूं। यह पूर्ण रूप से शुद्ध होता है। इससे पैदावार भी अच्छी और ज्यादा होती है। केमिकल खाद उपयोग नहीं करता हूं। केमिकल खाद से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कमी आती है। केमिकल खाद से जो फसल तैयार होते है। उस तैयार फसल में धान गेंहू या अन्य जो खाते है वह भी ज्यादा विटामिन नहीं मिलता है। इसलिए किसानों से जैविक खाद से ही खेती करने की सलाह दी है। किसान ने बताया कि अभी कृषि विभाग से किसी प्रकार अनुदान नहीं मिला है।
इस संबंध में कृषि विभाग के अधिकारियों से पूछे जाने पर बताया कि भगवानपुर में तीन चार किसानों द्वारा शुगर फ्री काला धान की खेती करने की सूचना है। किसी प्रकार के अनुदान इस पर नहीं है।
क्या आप शुगर/डायबिटीज/मधुमेह के मरीज है या आप के कोई रिश्तेदार है। अगर हां तो आपको चावल खाने के लिए डॉक्टर द्वारा मनाही होगी। क्योंकि शुगर मरीजो को चावल,आलू,चीनी मीठाई आदि समान खाना आपको परेशानी में डाल सकता है। आपका शुगर लेवल बढ़ा देगा जो काफी घातक भी सिद्ध होता है। बाजार में शुगर फ्री चाय,दवा व अन्य सामान आ चुकी है। जो शुगर मरीज उपयोग भी करते है। लेकिन वे अपने खाने में चावल खाने व उसके सोचने भी डरते है। क्योंकि चावल खाने से शुगर बढ़ जाता है। लेकिन आपके लिए खुशखबरी है। अब आप चावल खा सकते है वह भी शुगर फ्री चावल। जो बाजार में आ गया है। आज हम आपको बताने जा रहे है। कहाँ कहाँ शुगर फ्री चावल उपजाया जा रहा है। अब बाजार में सुगर फ्री धान भी आ गया है। जिसे किसानों द्वारा उपजाया जाने लगा है।
भगवानपुर प्रखंड के बखारबांध गांव के किसान ने उपजाया शुगर फ्री धान
ऐसा ही एक किसान है कि जो कैमूर में अलग प्रकार के धान को उपजाया है। जो शुगर फ्री धान है। यह किसान है कैमूर के भगवानपुर प्रखंड के जैतपुर कलां पंचायत के बखारबाँध के रामनिवास सिंह है। जिन्होंने मधुमेह रोगियों के लिए ऐसे धान को उपजाया है जिसे भोजन के रूप में खाने पर किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होगा। उस धान का नाम है काला नमक(काला धान)। जिसे शुगर फ्री धान कहा जाता है। जो मधुमेह रोगियों के लिए काफी फायदेमंद होगा।
अब डायबिटीज मरीज भी खा सकते चावल
मधुमेह रोगी यानी शुगर पेसेंट बेहिचक ब्लैक राइस काला धान का चावल अपने भोजन में ले सकते है। कैमूर में यह शुगर फ्री धान हर कही नहीं उपजाया जा रहा है और न ही ज्यादातर किसानों को जानकारी ही है। कैमूर के कुछ किसानों द्वारा खेती की जा रही है। यहां तक की कृषि विभाग को भी उतना जानकारी इसके बारे नहीं है। किसान द्वारा काला धान की खेती के अलावा ब्रोकली गोभी की भी अपने खाने के लिए खेती करते है। जिसका सब्जी व सलाद के रूप में उपयाग करते है। जिसमें विटामिन काफी मात्रा में मिलता है।
यूपी से किसान ने लाया शुगर फ्री काला नमक धान की बीज व की खेती
किसान रामनिवास सिंह ने बताया कि मैं यूपी में एक रिश्तेदारी में गया था तो देखा कि वहां काला धान की खेती की जा रही थी। जो शुगर फ्री है। उस दौरान मुझे जानकारी होने पर मैंने तीन किलो काला धान 700 रुपये प्रति किलो की दर से 2100 रुपये खरीदा था। उस तीन किलो बीज को 1 बीघे खेती में काला धान के बीज को लाकर जून जुलाई में बुआई किया था। इस काले धान का खेती करने पर 8-10 क्विंटल दर जाता है। अभी मैं अपने घर पर धान की कुटाई करा कर उसका भोजन के रूप में खाने में प्रयोग करते है। और बेच भी सकते है। लेकिन इसका 4000 -4500 रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा ही हो सकता है।उन्होंने किसानों के लिए कहा कि अगर किसान काला नमक शुगर फ्री धान की खेती करते है तो उनके काफी फायदा उन्हें अन्य धान की अपेक्षा अच्छा कीमत मिलेगा।
जैविक खाद से करते है खेती
किसान ने बताया कि मैं खेती जैविक खाद से करता हूं। यह पूर्ण रूप से शुद्ध होता है। इससे पैदावार भी अच्छी और ज्यादा होती है। केमिकल खाद उपयोग नहीं करता हूं। केमिकल खाद से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कमी आती है। केमिकल खाद से जो फसल तैयार होते है। उस तैयार फसल में धान गेंहू या अन्य जो खाते है वह भी ज्यादा विटामिन नहीं मिलता है। इसलिए किसानों से जैविक खाद से ही खेती करने की सलाह दी है। किसान ने बताया कि अभी कृषि विभाग से किसी प्रकार अनुदान नहीं मिला है।
इस संबंध में कृषि विभाग के अधिकारियों से पूछे जाने पर बताया कि भगवानपुर में तीन चार किसानों द्वारा शुगर फ्री काला धान की खेती करने की सूचना है। किसी प्रकार के अनुदान इस पर नहीं है।


