#ऐतिहासिक है भगवानपुर हाईस्कूल का यह भवन
#अंग्रेजी फौज एक साल तक वीर कुंवर सिंह को पकड़ने के लिए करते रहे कोशिश,नहीं हुए कामयाब
भभुआ/कैमूर/बंटी जायसवाल की रिपोर्ट
देश को आजाद कराने में बहुत से स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी। अंग्रेजी फौज को अपने कारनामें से छक्के छुड़ा दिए थे। ऐसा ही किस्सा के बारे आज हम आपको बताते है। यह किस्सा है स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह से संबंधित है। जिसके खोज में अंग्रेजी फौज खोजती रही लेकिन अंत नहीं पकड़ पायी थी। उसी भोजपुर आरा के वीर कुँवर सिंह के बारे में किस्सा बताते है। जिनके नाम पर वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय है।

तो चलिए आज हम बताते है क्या वह किस्सा है। जानकार योगेंद्र सिंह के मुताबिक,यह किस्सा 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से है। जब इस स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी वीर कुंवर सिंह झारखंड के रामगढ़ मिलिट्री छावनी में मंगल पांडे के द्वारा अग्रेजो के खिलाफ छेड़ी गई क्रांति को हवा दिया था। जब वहां डुमरांव लौटे थे तब वहां के राजा अंग्रेजों के भय से वीर कुंवर सिंह को क्षेत्र बदर कर दिया था।
सूचना के बाद कैप्टन ब्राउन के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज भगवानपुर पहुँची।यहां के राजा की एक किला में अंग्रेजों ने अपना डेरा डाला था। जो वर्तमान में भगवानपुर प्लस टू उच्च विद्यालय के परिसर के दक्षिण में बने प्राचीन भवन की तरह आज भी विद्यमान है।
इस दौरान अंग्रेजी फौज के हाथों में हाथ मलते रह गयी। उन्हें इस बार भी कुंवर सिंह हाथ नहीं लगे। अंग्रेजी फौज वीर कुंवर सिंह को पकड़ने में नाकामयाब रही।फिर जब एक साल तक कैंप कर अंग्रेजी फौज के कैप्टन ब्राउन को कुछ हासिल नहीं हुआ तो अंग्रेज अधिकारियों ने उन्हें वापस बुला लिया। वापस जाते समय अंग्रेजी फौज की टीम के कैप्टन ब्राउन ने इस किला यानी भवन पर अपना नाम फोर्ट ब्राउन और 1858 अंकित करा दिया। जो आज भी यह ऐतिहासिक भवन किला दर्शाता है कि अंग्रेजी फौज की यहां आयी थी।
#अंग्रेजी फौज एक साल तक वीर कुंवर सिंह को पकड़ने के लिए करते रहे कोशिश,नहीं हुए कामयाब
भभुआ/कैमूर/बंटी जायसवाल की रिपोर्ट
देश को आजाद कराने में बहुत से स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी। अंग्रेजी फौज को अपने कारनामें से छक्के छुड़ा दिए थे। ऐसा ही किस्सा के बारे आज हम आपको बताते है। यह किस्सा है स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह से संबंधित है। जिसके खोज में अंग्रेजी फौज खोजती रही लेकिन अंत नहीं पकड़ पायी थी। उसी भोजपुर आरा के वीर कुँवर सिंह के बारे में किस्सा बताते है। जिनके नाम पर वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय है।
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तो चलिए आज हम बताते है क्या वह किस्सा है। जानकार योगेंद्र सिंह के मुताबिक,यह किस्सा 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से है। जब इस स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी वीर कुंवर सिंह झारखंड के रामगढ़ मिलिट्री छावनी में मंगल पांडे के द्वारा अग्रेजो के खिलाफ छेड़ी गई क्रांति को हवा दिया था। जब वहां डुमरांव लौटे थे तब वहां के राजा अंग्रेजों के भय से वीर कुंवर सिंह को क्षेत्र बदर कर दिया था।
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तब वह रोहतास के बड्डी निवासी निशांत सिंह से मुलाकात कर भगवानपुर प्रखंड के मकरीखोह के जंगल में आ कर डेरा डाला था। जब इस बात की पता अंग्रेजों की व्यवसायिक प्रतिष्ठान केसरी गंज के नील कोठी के अफसरों को लगी तो उस समय अंग्रेज अधिकारियों ने ब्रिटिश अफसरों को दी।सूचना के बाद कैप्टन ब्राउन के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज भगवानपुर पहुँची।यहां के राजा की एक किला में अंग्रेजों ने अपना डेरा डाला था। जो वर्तमान में भगवानपुर प्लस टू उच्च विद्यालय के परिसर के दक्षिण में बने प्राचीन भवन की तरह आज भी विद्यमान है।
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जिस पर फोर्ट ब्राउन 1858 लिखा हुआ है।जब अंग्रेजी फौज वीर कुंवर सिंह को भगवानपुर में पकड़ने आयी थी तो एक वर्ष इस किले में डेरा डाला था। लगातार वीर कुंवर सिंह के बारे में पता लगाते रहे। अंग्रेजी फौज की आने की सूचना जब वीर कुंवर सिंह को लगी तो उन्होंने जंगल के रास्ते विजयगढ़ (सोनभद्र)होते हुए झांसी यूपी के झांसी तक कुच कर गए थे।इस दौरान अंग्रेजी फौज के हाथों में हाथ मलते रह गयी। उन्हें इस बार भी कुंवर सिंह हाथ नहीं लगे। अंग्रेजी फौज वीर कुंवर सिंह को पकड़ने में नाकामयाब रही।फिर जब एक साल तक कैंप कर अंग्रेजी फौज के कैप्टन ब्राउन को कुछ हासिल नहीं हुआ तो अंग्रेज अधिकारियों ने उन्हें वापस बुला लिया। वापस जाते समय अंग्रेजी फौज की टीम के कैप्टन ब्राउन ने इस किला यानी भवन पर अपना नाम फोर्ट ब्राउन और 1858 अंकित करा दिया। जो आज भी यह ऐतिहासिक भवन किला दर्शाता है कि अंग्रेजी फौज की यहां आयी थी।



