कैमूर में हड़ताली TET शिक्षकों ने सामूहिक कराया मुंडन, मनाया मातम,सरकार के गलत नीतियों के खिलाफ किया विरोध प्रदर्शन

भभुआ में टेट शिक्षकों ने कराया सामूहिक मुंडन
सरकार टेट शिक्षको को अयोग्य ठहरा कर नहीं देना चाहती है वेतनमान, सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कर रही है अवहेलना
भभुआ/कैमूर(बंटी जायसवाल)।शुक्रवार को हड़ताली टेट शिक्षको ने सरकार के खिलाफ विरोध करने का अनोखा तरीका अपनाते हुए सामूहिक मुंडन करा कर मातम मनाया। दरअसल कैमूर जिला मुख्यालय स्थित लिच्छवी भवन के पास धरना स्थल पर हड़ताली टेट शिक्षको द्वारा बिहार राज्य शिक्षक समन्वय समिति के बैनर तले कैमूर के टीईटी प्रारंभिक शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के द्वारा सामूहिक मुंडन कार्यक्रम और नुक्कड़ सभा का आगाज किया गया।

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 इस दौरान नियोजित शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। वही हड़ताली टेट शिक्षको ने अपना बाल मुंडन करा कर सरकार के खिलाफ दोहरी नीति और दमनकारी नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन व नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को रखा। 
टेट शिक्षक सह महासचिव शैलेस कुमार सिंह ने बताया कि सरकार द्वारा 2012 के लेटर में नियुक्ति शब्द लिखा था और में टेट शिक्षको को नियुक्त करना था,लेकिन हमें नियोजन के तहत ला दिया गया। हमारे साथ धोखा हुआ है। सरकार हमें अयोग्य ठहरा रही है। ताकि वेतनमान नहीं देना पड़े। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का भी पालन नहीं कर रही है।जबकि टेट शिक्षक योग्य है। 

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वही हड़ताली शिक्षिका डॉ वंदना कुमारी ने बताया कि बिहार सरकार ने टेट शिक्षकों को नियुक्त न करके नियोजित बना दिया है। सरकार द्वारा टेट शिक्षकों को अयोग्य कहती है। जबकि हम योग्य है। सुप्रीम कोर्ट पारा 78 में कहती है कि टेट शिक्षको को पूर्ण वेतनमान व सहायक शिक्षक का दर्जा देना चाहिए। लेकिन बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नकार रही है। बिहार सरकार लोकतंत्र की लाज को रखे। अगर मानवता का अंत करना चाहता है तो इसी तरह शिक्षकों को हड़ताली दरी पर पायेगी। जब तक कि उन्हें पूर्ण वेतनमान व सहायक शिक्षक का दर्जा नहीं मिलता है। तब तक धरना जारी रहेगा और विद्यालयों में वापसी नहीं होगी।
गौरतलब है कि नियोजित शिक्षकों द्वारा समान काम के समान वेतन,सहायक शिक्षक का दर्जा, नियमित शिक्षकों की तरह सेवा शर्ते दिए जाने की मांगों को लेकर 17 फरवरी से ही विद्यालयों में तालाबंदी कर
अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। जिसके कारण छात्रों का पठन पाठन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ दिख रहा है।हड़ताली नियोजित शिक्षकों द्वारा जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड मुख्यालय पर बैठ कर धरना दिया जा रहा है। लेकिन इसके बाद भी सरकार का कोई ध्यान नहीं है। अगर सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं करती है तो आगे भी धरना जारी रहने की बात कही जा रही है।

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