भभुआ/कैमूर(बंटी जायसवाल)। कोरोना वायरस से बचाव को लेकर पूरे देश में लॉक डाउन का दूसरा चरण चल है। जो 3 मई तक चलेगा।वही देश में कोरोना भी अपना पांव तेजी से पसार रहा है। अब तक भारत में 17265 कोरोना संक्रमण का मामला पहुँच चुका है। जिसमें 2546 मामले ठीक हुए और 543 लोगों की मौत हो चुकी है। इस लॉक डाउन में गरीब,असहाय,मजदूर व जरूरतमंदों के बीच कई सामाजिक संगठन,जनप्रतिनिधियों व प्रशासन द्वारा खाने पीने का राशन वितरित किया जा रहा है।
लेकिन बेजुबान जानवर की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया। बेजुबान जानवर भूख के मारे मारे इधर उधर भटक रहे है। जहां भी भोजन की तरफ नजर पड़ती है। वहां जानवर झपट पड़ते है। लॉक डाउन के पहले बेजुबान जानवरों में कुत्ता व अन्य आवारा पशु इधर उधर सड़को पर घूमते हुए होटलों व अन्य मिठाई की दुकानों पर पहुँच खाकर अपना पेट पाल लेते थे। लेकिन लॉक डाउन के बाद इनकी स्थिति खराब हो गयी है।भूख के मारे ये बेजुबान जानवर बिलबिला रहे है।लेकिन कैमूर के भगवानपुर के युवा व दुकानदारों ने बेजुबान जानवरों की ऐसी स्थिति को देख कर उन्हें भूख मिटाने की ठान ली।
जिसके बाद भगवानपुर के युवा समाजसेवी व दुकानदारों द्वारा बेजुबानों जानवरों को खिचड़ी व खीर एक दिन बीच करके खिला रहे है। भगवानपुर के युवा समाजसेवी प्रेमचंद पासी व उनके साथी पिंटू बारी, दीपक बारी, बंटी कश्यप, अमित कुमार साधु हलवाई ,गणेश हलवाई आदि ने सभी दुकानों के बंद रहने के कारण गरीब परिवारों महादलितों व आवारा कुत्तों को प्रतिदिन खीर व खिचड़ी खिलाते है। उनका कहना है कि यह कार्य एक सप्ताह से चल रहा है और आगे भी जब तक लॉक डाउन रहेगा तब तक इन बेजुबानों की भूख मिटाया जाएगा। इस कार्य को देखते हुए लोगों द्वारा इनके काम की सराहना की जा रही है ।
युवाओं ने सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए बेजुबान जानवर कुत्ता, गाय को भोजन अपने हाथों से बनाने के बाद खिलाते है। युवाओ का कहना है कि जो सामाजिक संगठन,जनप्रतिनिधियों व प्रशासन द्वारा गरीब असहायों को मदद तो किया जा रहा है।उन्हें खाने पीने का राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।ऐसे में सक्षम लोगों को बेजुबान जानवरों की तरफ भी ध्यान देते हुए उनके भूख मिटाने के लिए आगे आना चाहिए। वही कोरोना वायरस से बचाव को लेकर आपस में दूरी बनाकर रहने की बात कही गयी। जन-जन को लॉक डाउन में घर से बाहर नहीं निकले और सोशल डिस्टेंसिंग पालन जरूर करना चाहिए।
लेकिन बेजुबान जानवर की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया। बेजुबान जानवर भूख के मारे मारे इधर उधर भटक रहे है। जहां भी भोजन की तरफ नजर पड़ती है। वहां जानवर झपट पड़ते है। लॉक डाउन के पहले बेजुबान जानवरों में कुत्ता व अन्य आवारा पशु इधर उधर सड़को पर घूमते हुए होटलों व अन्य मिठाई की दुकानों पर पहुँच खाकर अपना पेट पाल लेते थे। लेकिन लॉक डाउन के बाद इनकी स्थिति खराब हो गयी है।भूख के मारे ये बेजुबान जानवर बिलबिला रहे है।लेकिन कैमूर के भगवानपुर के युवा व दुकानदारों ने बेजुबान जानवरों की ऐसी स्थिति को देख कर उन्हें भूख मिटाने की ठान ली।
जिसके बाद भगवानपुर के युवा समाजसेवी व दुकानदारों द्वारा बेजुबानों जानवरों को खिचड़ी व खीर एक दिन बीच करके खिला रहे है। भगवानपुर के युवा समाजसेवी प्रेमचंद पासी व उनके साथी पिंटू बारी, दीपक बारी, बंटी कश्यप, अमित कुमार साधु हलवाई ,गणेश हलवाई आदि ने सभी दुकानों के बंद रहने के कारण गरीब परिवारों महादलितों व आवारा कुत्तों को प्रतिदिन खीर व खिचड़ी खिलाते है। उनका कहना है कि यह कार्य एक सप्ताह से चल रहा है और आगे भी जब तक लॉक डाउन रहेगा तब तक इन बेजुबानों की भूख मिटाया जाएगा। इस कार्य को देखते हुए लोगों द्वारा इनके काम की सराहना की जा रही है ।
युवाओं ने सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए बेजुबान जानवर कुत्ता, गाय को भोजन अपने हाथों से बनाने के बाद खिलाते है। युवाओ का कहना है कि जो सामाजिक संगठन,जनप्रतिनिधियों व प्रशासन द्वारा गरीब असहायों को मदद तो किया जा रहा है।उन्हें खाने पीने का राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।ऐसे में सक्षम लोगों को बेजुबान जानवरों की तरफ भी ध्यान देते हुए उनके भूख मिटाने के लिए आगे आना चाहिए। वही कोरोना वायरस से बचाव को लेकर आपस में दूरी बनाकर रहने की बात कही गयी। जन-जन को लॉक डाउन में घर से बाहर नहीं निकले और सोशल डिस्टेंसिंग पालन जरूर करना चाहिए।

