उगी ऐ सुरुज देव, भइले अरघ के बेर...कैमूर में उदयीमान भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के साथ छठ महापर्व संपन्न

 फ़ोटो - उगते हुए भगवान सूर्य को अर्घ्य देती व्रती
व्रतियों ने सुख,समृद्धि और लंबी उम्र की कामना
भभुआ/कैमूर(बंटी जायसवाल). जिला मुख्यालय भभुआ सहित सभी प्रखंडो के गांवों में रविवार की सुबह उदयीमान भगवान भास्कर को व्रतियों को द्वारा अर्घ्य देने के साथ ही चार दिवसीय लोक आस्‍था का छठ महापर्व सम्पन्न हो गया। इस दौरान घाटों पर छठ मइया व भगवान भास्कर को अर्घ देते हुए व्रती अपने घर,परिवार की सुख,समृद्धि, शांति व लंबी उम्र के लिए कामना की.
कैमूर जिले सहित पूरे बिहार में धूमधाम व शान्तिपूवर्क मनाया गया। शनिवार की शाम व्रतियों द्वारा अस्तचलगामी यानी डूबते हुए भगवान सूर्य को तो रविवार की सुबह उगते हुए भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया गया। जिसके बाद लोक आस्था का यह महापर्व छठ पूजा सम्पन्न हो गया। कैमूर जिला मुख्यालय भभुआ शहर के राजेन्द्र सरोवर, पूरब पोखरा, बाबा जी पोखर, सुअरन नदी सहित, जिले के दुर्गावती नदी,कर्मनाशा नदी सहित तालाब व पोखर, नहरों में छठ व्रतियों ने डूबते व उगते हुए भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया। छठ घाट पर काफी रौनक देखने को मिली। छठ घाट पर बच्चे भी मस्ती करते देखें गए। व्रतियों द्वारा छठ घाट पर छठ मईया का कई गीत भी गाये गए।
उगी ऐ सुरुज देव, भइले अरघ के बेर
कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाये... पानी में खड़े होकर शुक्रवार के सुबह उदयीमान सूर्य को अर्घ के दौरान व्रती उगी ऐ सुरूज देव, भईले अरघ के बेर आदि कई गीत गा रही थी. कई व्रती दंडवत करते हुए नदी घाट पर पहुंचे. लोगों को मानना है कि जो छठ मईया से सच्चे दिल से जो कुछ भी मांगा गया होता है पूरी होने पर दंडवत करते हुए छठ घाट पर जाते है. युवाओं व विभिन्न समितियों द्वारा छठ घाट की साफ सफाई करायी गयी थी. लाइट व सजावट भी की गयी थी.
शनिवार की शाम 3 - 4 बजे से छठ व्रती व उनके परिवार के लोग ईंख, सूप, डाल दउरा को पूजा सामग्री व फल से सजा अस्तचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के लिए छठ घाट पर पहुँचे। व्रती छठ घाट पर पानी पर खड़े होकर भगवान सूर्य की आराधना की। इसके बाद डूबते हुए भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया।वही रविवार को चार दिवसीय छठ महापर्व प्रात:कालीन अर्घ्य के बाद व्रती अपने घरों की ओर लौट गए. नहाय-खाय से आरंभ चार दिवसीय छठ महापर्व का रविवार को अंतिम दिन था. छठ घाटों पर पहले दिन शनिवार को व्रतियों के जाने का सिलसिला दोपहर तीन बजे से ही शुरु हो गया था।
दंडवत करते छठ घाट पहुँची
इस दौरान खासकर मनोकामना पूरी होने पर दंड लगाते हुए घाटों पर जाने वाले व्रती भी पहुंचे. श्रद्धालुओं ने उनके लिए रास्ता छोड़ दिया. शनिवार के शाम घाट से लौटने के बाद मन्नत वाली व्रती अपने घरों में छठ मइया के लिए कोसी भी भरा. रविवार को सुबह दूसरा अर्घ्य देने के साथ छठ महापर्व संपन्न हो गया।
व्रतियों को बांटा गया चाय
सबार दूर्गावती नदी छठ घाट पर व्रतियों के लिए लोगों द्वारा हर तरह की व्यवस्था किया गया था। सुबह में अर्घ्य देने वाले व्रतियों व अन्य लोगों को भी बजरंग दल, नाथ बाबा दल के
युवकों व लोगों ने चाय पानी पिलाया। इसके नदी के पूरब में रोहतास के चेनारी के छठ व्रतियों को भी नाथ बाबा दल के युवकों ने चाय पिलाया।
#व्रतियों ने मंदिरो में की पूजा अर्चना 
लोक आस्था का महापर्व छठ करने वाली व्रतियों ने भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के बाद नाथ बाबा, काली मईया, दुर्गा माँ और घर की देवी देवताओं की भी पूजा अर्चना की। 

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