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| यूपी बिहार बॉर्डर पर तैनात अधिकारी व जवान |
दुर्गावती/कैमूर। देश में कोरोनावायरस के कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया गया है पूरे देश में 14 अप्रैल तक ऑकडाउन की घोषणा कर दी गई है.इसी क्रम मे एक अप्रैल से यूपी-बिहार सीमा पर कर्मनाशा नदी पुल के पास लाक डाउन के अनुपालन मे बुधवार को कैमूर प्रशासन द्वारा सीमाओं को सील कर दिया गया .तथा बॉर्डर पर फोर्स की तैनाती कर दी गयी है. तैनात पुलिस प्रशासन द्वारा यूपी तथा बिहार से आने वाले वाहनों एवं लोगों पर कड़ी नजर रखी जा रही है.यूपी और बिहार से आने वाले सभी लोगों का वकायदे जांच पड़ताल किया जा रहा है.
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लोगों को घरों में रहने की हिदायत दी जा रही है. इस दौरान अनुमंडल पदाधिकारी शिव कुमार राउत एवं पुलिस पदाधिकारी रघुनाथ सिंह ने यूपी बिहार बॉर्डर पर पहुचकर जायजा लिया. बताते चलें कि यूपी बिहार बॉर्डर पर 28 से 31 मार्च तक अन्य प्रदेशों से आने वाले लोगों का जिलाधिकारी के निर्देश पर कैंप लगाकर चिकित्सकों द्वारा जांच किया जा रहा था.लॉकडाउन के बाद दिल्ली राजस्थान गुजरात पंजाब सहित अन्य राज्यों में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर फस गए थे.
देश के अंदर कंपनियों के बंद हो जाने से मजदूरों के सामने रोजी रोटी एवं रहने की समस्या खड़ी हो गई थी. उसके बाद गरीब मजदूर अपने घर को पलायन करने को मजबूर हो गए थे.इस क्रम में 28 से लेकर 31 मार्च तक लगातार काफी संख्या मे गरीब मजदूर बिहार सीमा में प्रवेश करने को मजबूर रहे. चार दिनों तक यह प्रवासी मजदूर ट्रकों एवं बसों में सवार होकर बिहार सीमा में आते रहे और बिहार प्रशासन द्वारा बॉर्डर पर इन लोगों को रोककर उनकी थर्मल स्क्रीनिंग करा कर उन्हें गृह जनपद को भेजा जाता रहा.
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बुधवार को प्रशासन द्वारा लॉक डाउन का अनुपालन करते हुए यूपी बिहार सीमा को सील कर दिया गया और चप्पे-चप्पे पर अधिकारियों एवं पुलिस का पहरा लगा दिया गया. ये अधिकारी यूपी से आने वाले प्रत्येक वाहनों एवं लोगों पर नजर गड़ाए हुए थे. जो भी वाहन एवं लोग आ रहे थे. उन्हें रोककर जांच पड़ताल की जा रही थी.इमरजेंसी हालत में ही लोगों को बिहार की सीमाओं में जाने दिया जा रहा था .इसी तरह जरूरी सामानों के वाहनों को ही बिहार में प्रवेश करने दिया जा रहा था.

