उनका हौसला बढ़ाया। जानकारी के मुताबिक, स्पेशल श्रमिक ट्रेन में कैमूर जिला के विभिन्न प्रखंडों के 978 श्रमिकों सहित कुल 1221 श्रमिक सवार थे। अपने गृह जिले में स्टेशन पर ट्रेन से उतरते ही प्रवासियों के चेहरे पर खुशी देखने को मिली। उनकी चेहरे खिल गए थे। प्रवासियों का कहना था कि कोरोना ने हमारी जिंदगी बर्बाद कर दी।
बाहर में लॉक डाउन में फंसे होने से घुट घुट कर जी रहे थे। खाने के लिए लाले पड़ गए थे। आज वे अपने गांव पहुँच कर काफी खुशी महसूस कर रहे हैं। भभुआ रोड स्टेशन पर प्रवासियों को उतरने के बाद खाने पीने की व्यवस्था की गई थी। इस दौरान सोशल डिस्टेंस को ध्यान में रखते हुए स्टेशन के उत्तरी अंतिम छोर के रास्ते मजदूरों को बाहर बारी-बारी से निकाला जा रहा था।
जैसे ही मजदूर सीढ़ी के रास्ते बाहर निकल रहे थे। वहां पर तैनात कर्मी द्वारा एक मजदूर के हाथों को सेनेटाइजर से हाथ धुलवाया जा रहा था।इसके बाद मजदूरों को पानी व भोजन देने के बाद बसों की तरफ रवाना किया जा रहा था। जहां उन्हें भोजन कराया गया। स्पेशल श्रमिक ट्रेन से उतरने के बाद कैमूर, रोहतास, बक्सर, छपरा जिला के प्रवासियों का मेडिकल टीम द्वारा थर्मल स्क्रीनिंग किया गया।
वही स्टेशन के पास बस खड़ी थी। जहां प्रवासियों को कैमूर जिले के विभिन्न प्रखंडो के क्वारंटाइन सेंटर में रखा जाएगा। अन्य जिला के प्रवासियों को उन्हें उनके गृह जिला जिला प्रशासन द्वारा बस से भेजा गया।
जिसमें 978 प्रवासी मजदूर कैमूर के शामिल थे।इन प्रवासी मजदूरों को उनके घर सुरक्षित भेजने के लिए कैमूर प्रशासन पूरी तरह से पहले से ही अलर्ट थी। सभी को उनके जिला मे भेजने के लिए बसों का इंतजाम किया गया।उनको यहां से भोजन का पैकेट व पीने का पानी देकर रवाना किया गया।
ट्रेन में कुल 9 जिलों के 1221 प्रवासी सवार थे। जिसमें सबसे अधिक कैमूर के 978, रोहतास के 60, बक्सर के 44, गोपालगंज के 39, पश्चिमी चंपारण के 33, सारण के 25, गया के 22, अरवल के 14, औरंगाबाद के 2 और अन्य 4 प्रवासी सवार रहे। श्रमिक एक्सप्रेस के आगमन को लेकर जिला प्रशासन और स्टेशन प्रबंधन की ओर से स्टेशन पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। स्टेशन पर सभी प्रवासियों की थर्मल स्क्रीनिंग भी की गई।


