लॉक डाउन में 1300 सौ किलोमीटर साइकिल चलाकर प्रवासी पहुंचे अपने मातृभूमि पर, सुनाया अपना दर्द

भभुआ/भगवानपुर/कैमूर(बंटी जायसवाल)।
दूसरे राज्यों में कमाने के लिए गए प्रवासी मजदूरों को जब कोरोना से फैले संक्रमण से बचाव को लेकर किये गये लॉक डाउन में दूसरे राज्यों में फैक्ट्रियों के बंद होने के बाद काफी परेशानी होने लगी। इस दौरान कुछ दिनों तो जैसे तैसे काट लिया। लेकिन परेशानी और गांव व परिवार की याद आने लगी तो गुजरात से साईकिल से अपने गांव के लिए 1300 किलोमीटर की दूरी 13 दिनों में तय कर भगवानपुर पहुँचे कैमूर जिले के भगवानपुर प्रखंड के रमावतपुर गांव के तीन प्रवासी मजदूर। अपने क्षेत्र में पहुँच कर खुश है। 

उनका कहना है कि अपने धरती की मिट्टी कितनी प्यारी होती है। यह हमें अपने पास खींच ही लायी। स्थानीय प्रशासन को प्रवासी मजदूरों के आने की सूचना मिली तो उन्हें भगवानपुर सीएचसी के बगल में स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में बने क्वारन्टीन सेन्टर में रखा गया। प्रवासी मजदूरों ने बताया कि जब यहां पहुँचे है तो उनका 4 घण्टे बीतने के बाद स्वास्थ्य जांच व स्क्रीनिंग नहीं हो पाया है। 

मजदूरों ने बताया कि गुजरात से आने के दौरान रास्ते में कई जगह पर स्क्रीनिंग किया गया। रमावतपुर गांव के प्रवासी मजदूर राजकुमार गुप्ता ने बताया कि अपने परिवार की जीवन यापन करने के लिए हम लोग गुजरात के वापी के एक फैक्ट्री में काम कर रहे थे। जब देश में कोरोना जैसे वैश्विक महामारी को ले लॉक डाउन हुआ तो फैक्ट्री बंद हो गयी। कंपनी के तरफ से दो किलो चावल व दो किलो आटा देकर चुप्पी साध ली गयी। जहां पर रहते थे। वहां पर घर से निकलना मुश्किल था। 

जो पैसे बचे उसका कुछ खाद्य सामग्री लाकर जैसे तैसे 21 दिनों का 14 अप्रैल तक लॉक डाउन का दिन गुजारे। गुजरात सरकार कोई मदद प्रवासी मजदूरों का नहीं कर रही थी। बिहार सरकार का सिर्फ मदद का भरोसा मिलता था। ऐसे में लॉक डाउन में एक दिन का दिन काटना मुश्किल होता जा रहा था। मैं अपने गांव के तीन साथियों के साथ था। वही बिहार के दूसरे जिले के बहुत से मजदूर फंसे हुए है। सभी परेशान है।


 हम लोगों ने 14 अप्रैल तक लाकडाउन खुलने का इंतजार किया लेकिन फिर भी नहीं खुला और दूसरे चरण का लॉक डाउन बढ़ा दिया गया तो परेशानी भी बढ़ने लगी। एक दिन गुजरना एक साल के बराबर लग रहा था। कोई रास्ता नहीं दिखाई पड़ा तो आसपास के लोगों व कुछ पैसे देकर साइकिल का इंतजाम किया। फिर अपने के लिए 22 अप्रैल को गुजरात को वापी से चल दिये। रास्ते में भी आने के दौरान कई मुसीबतों का सामना करना पड़ा।

 खाने के लिए हमारे पास कुछ नहीं था। जो कुछ लोगों रास्ते में मिल जाता था। वही खाते थे। फिर आराम करने के बाद चलते थे। एक दिन में 90-100 किलोमीटर साईकिल चलाते थे। प्रवासी मजदूरों ने बताया मध्य प्रदेश की सरकार व पुलिस प्रशासन ने काफी सहयोग किया। जब मध्यप्रदेश से यूपी,यूपी से बिहार बॉर्डर पहुँचे। यहां भी उनका स्क्रीनिंग जांच किया गया। तब वे अपने प्रखंड भगवानपुर पहुँचे तो फिर प्रशासन द्वारा उन्हें यहां क्वारन्टीन किया गया है। 

परिवार वालों से भेंट नहीं हो पायी है। गांव नहीं जा सके। लेकिन अपने क्षेत्र में आ गए है। बहुत खुश है। अभी हमलोग क्वारन्टीन सेंटर में रहेंगे। परिवारवालों से बात हुई है। मजदूरों का कहना है कि अगर हम अपने परिवार या गांव में जाएंगे तो परेशानी हो सकती है। इसलिए उन्हें परेशानी नहीं डालना चाहते है। वे सुरक्षित रहेंगे तभी हम भी सुरक्षित रहेंगे। 

बोले सीओ
भगवानपुर सीओ विनोद कुमार सिंह ने बताया कि क्वारन्टीन सेंटर में प्रवासी मजदूरों के लिए सभी प्रकार की सुविधाएं दी जायेगी। उन्हें किसी प्रकार का कोई दिक्कत नहीं होगा।

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