भभुआ कैमूर. कोरोना को लेकर हुए लॉक डाउन से सभी
बेहाल है. इसमें सबसे ज्यादा बेहाल, मजबूर, परेशान है गरीब, असहाय प्रवासी मजदूर. जो
अपना गांव घर छोड़कर दो जून की रोटी और पेट पालने के लिए दूसरे शहरों में कमाने के
लिए गये थे. लेकिन कोरोना ने सब कुछ इन मजदूरों से छीन लिया. कोरोना को लेकर लॉक डाउन
में सभी कंपनियों के फैक्ट्रियों को बंद कर
दिया. जिसके प्रवासी मजदूर बेरोजगार हो गये. लॉक डाउन में उन्हें खाने के लिए लाले
पड़ने लगे. जब तक उनके पास कुछ खाने के लिए था या लोगों से मदद मिल जाता था.तब तक काम चलाया. लेकिन जब लॉक डाउन का तिथि बढ़ता गया तो उनसे रहा गया और लॉक डाउन में कुछ छूट मिलने के बाद सरकार के बिना सहारें हजारों प्रवासी पैदल, साईकिल,ट्रकों से अपने घरों के लिए निकल पड़ रहे है. ऐसा एक मामला प्रवासी मजदूर का कैमूर में सामने आया है. जहां चेन्नई से 30 प्रवासी मजदूर लाखों रूपयें खर्च कर बस से कैमूर पहुंचे है. प्रवासियों ने बताया कि बस का किराया के 2 लाख 10 हजार रूपये यहां तक पहुंचे है बहुत परेशानियों में. वे सभी कैमूर जिले के अधौरा प्रखंड के रहने वाले है.
उनका कहना था कि वे लोग चेन्नई कमाने के लिए गये थे. लेकिन कोरोना को लेकर हुए लॉक डाउन में फैक्ट्री, कंपनियों के बंद हो जाने के बाद फंस गये. कामधंधा बंद होने के बाद बेरोजगार हो गये. इस दौरान उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. लॉक डाउन के बढ़ते रहने की वजह से हम सभी के पास जो पैसे बचे थे वह भी भी खत्म होने लगा था. जब कुछ रूपये पैसे बचे थे तो परेशानियों को देखते हुए रहा नहीं गया. गांव आने लिए जुगाड़ लगाने लगे.
जिसके बाद हम सभी ने आपस में पैसे इकट्ठा कर 2 लाख 10 हजार रूपये जुटाये और जिससे एक बस किया और उसी बस से यहां कैमूर आये है. वही प्रवासी मजदूर कहना था कि लॉक डाउन के दौरान जो हमने दर्द सहा है. वह जिंदगी भर याद रहेगा. एक प्रवासी मजदूर का कहना था कि जब मेरे गांव आने के लिए बस का किराया देने का रूपये खत्म हो गया था तो अपने दोस्त से 7 हजार रूपये उधारी लेकर बस का किराया देकर आज यहां पहुंचा हूं.
हालांकि सरकार द्वारा श्रमिक ट्रेने और बसों से प्रवासियों को भेजने का काम किया जा रहा है. लेकिन आज भी हजारों लोगों के पास सरकार का सहायता नहीं पहुंच पा रहा है. जिसके कारण लोग सरकार का भरोसा छोड़कर अपने पर आत्मनिर्भर बन कर शहरों से अपने गांव के लिए पैदल, साईकिल, ट्रकों पर बैठ कर जाते हुए देख जा रहे है. अभी भी प्रवासियों पलायन जारी है. कई तस्वीरें तो प्रवासियों की दिल दहलाने वाली सामने आ रही है. जिनके दुख दर्द को बयां करना मुश्किल हो जाता है. कैसे ये लोग लॉक डाउन के लंबें दिनों को देखा और जिया होगा. वह उन परिवारों ने जिसके छोटे छोटे मासूम बचें होंगे.
