कैमूर के छात्र प्रदीप ने 471 अंक लाकर मैट्रीक में बिहार में TOP 10 में बनायी जगह, इंजीनियर बनने का है सपना

कुदरा/भभुआ/कैमूर
। अगर कोई भी छात्र दिल से मन लगाकर परिश्रम करते हुए पढ़ाई करें। उसे सफलता जरूर मिलती है। उसकी मेहनत रंग भी लाता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है कि कैमूर में किसान के पुत्र प्रदीप कुमार ने। जिसने बिहार बोर्ड के मैट्रीक परीक्षा में 471 अंक लाकर कैमूूूर जिले से बिहार में टॉप टेन में स्थान प्राप्त किया है। जिससे कैमूर का नाम बिहार में रौशन किया है। 

 मंगलवार को बिहार बोर्ड के मैट्रीक रिजल्ट आने के बाद देख कर प्रदीप के घर में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। प्रदीप को बधाई देने वाले का तांता लग गया। प्रदीप की सफलता को देखकर कर माता पिता ने मिठाई खिला कर मुंह मीठा किया। वही प्रदीप ने पैर छूकर माता पिता सहित सभी बड़े लोगों का आशीर्वाद लिया। 
टॉपर प्रदीप कैमूर जिले के कुदरा प्रखंड के सिसवार गांव का निवासी है। उसके पिता का नाम रामाशीष प्रसाद किसान है और माता का नाम नीलम देवी गृहिणी है। वह गांव के ही हाईस्कूल सिसवार से मैट्रीक का छात्र होते हुए परीक्षा दिया। बताया जाता है कि गांव के सरकारी विद्यालय में पढ़ाई लिखाई की है।बचपन से होनहार छात्र होने के साथ पढ़ाई में मन लगता है।क्योंकि घर में पढ़ाई लिखाई का माहौल था।

 सभी भाई बहन पढ़ने वाले है। प्रदीप दो भाई दो बहनों में सबसे छोटा है।  प्रदीप ने बताया कि वह आईआईटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर इंजीनियर बनने का सपना है। जिसे दृढ़ इच्छाशक्ति और परिश्रम की बदौलत पूरा करूंगा। यह भी बताया कि गांव में हाईस्कूल होने से की वजह से पढ़ाई करने जाता और घर लौट कर फिर समय से पढ़ाई करने लगता था।

 वह रोजाना लगभग 10-12 घण्टे तक पूरी मन लगाकर पढ़ाई करता था। हर विषय पर ध्यान देता था। इस सफलता का श्रेय माता पिता और गुरुजनों को जाता है। जिन्होंने हमेशा मुझे मदद किया। उसने बताया कि पढ़ाई की असली प्रेरणा माता पिता और भाई बहनों से घर पर ही मिली। उसकी सबसे बड़ी बहन बीकॉम कर चुकी है। 

जबकि बड़ा भाई पॉलिटेकनिक की पढ़ाई कर रहा है। उससे बड़ी एक अन्य बहन बायोलॉजी से बीएससी कर रही है।बड़े भाई बहनों ने हमेशा पढ़ाई के प्रति मोटिवेट किया। वही प्रदीप के पिता रामाशीष प्रसाद ने बताया कि दो बेटा और दो बेटी में वह सबसे छोटा है। घर में भाई बहनों का पढ़ता देखकर उसका भी मन पढ़ाई में रम गया।

 उन्होंने बताया कि वह स्वयं उस जमाने में इंटर तक की पढ़ाई की है। विज्ञान से स्नातक की पढ़ाई करना चाहा लेकिन आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वह सपना पूरा नहीं हो पाया। लेकिन बच्चों के सपने को पूरा कराने में कोई कमी नहीं होने देंगे।

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