मजदूर दिवस पर छलका मजदूरों का दर्द, लॉकडाउन ने छीना रोजगार, काम धंधा बंद हो जाने से हुए परेशान

दुर्गावती (कैमूर) मुबारक अली। 1 मई यानी आज मजदूर दिवस है लेकिन लॉडाउन की वजह से आज का दिन मजदूरों के लिए मुसीबतों भरा है जो हमेशा याद रहेगा इस बार कोरोना वैश्विक महामारी की वजह से काफी संख्या में मजदूरों व युवाओं का काम धंधा छिन गया है. जिसके कारण लोग  बेरोजगार हो गए हैं. अब वे घर बैठ गए हैं. अपना घर छोड़कर दूसरे राज्यों में कमाने के लिए गए हुए थे लॉकडाउन की वजह से काम धंधा बंद हो गया. जिससे हुए घर लौटने लगे है.देश के विकास मे मजदूरों की अहम भूमिका होती है.इनके श्रम को देखते हुए लंबे संघर्ष के बाद 1 मई को श्रम कानून बना था.

उसके बाद से पूरे विश्व में मजदूर दिवस मनाया जाता है. 1 मई को बड़े-बड़े सेमिनार भी आयोजित होते हैं. देशभर में बहुत सारी सभाएं होती है. लेकिन इस बार मजदूर दिवस  कोरोना संकट के बीच पड़ा है. इस कोरोना संकट के दौर में पूरे देश में लॉक डाउन की घोषणा की गई है. परिणाम स्वरूप लोगों को घरों में रहने के लिए अपील किया गया है. ऐसे में सबसे दिक्कतों का सामना इस समय मजदूरों को करना पड़ रहा है. कितने मजदूर कमाने खाने के लिए अपने घर से हजारों हजार किलोमीटर दूर  दिन दो दिन पहले ही दिल्ली बॉम्बे राजस्थान गुजरात आदि प्रदेशों में गए थे.

 उसके एक दो दिन बाद ही 24 मार्च की रात्रि  से देश में लाक डाउन हो गया. उसके बाद तो मानो मजदूरों के ऊपर आफत आ गई. देश के अंदर कल कारखाने उद्योग धंधे कंपनियां बंद हो गई. जिसके कारण कल कारखानों के मालिकों द्वार कंपनियों को बंद कर दिया गया और मजदूरों को हजार 500 देकर घर जाने को कह दिया गया .इससे सबसे खराब स्थिति मजदूरों की उस समय हो गई .जब जिस मकान में मजदूर रहते थे. उस मकान मालिक द्वारा भी मकान खाली करने को कह  दिया गया. जिसके कारण मजदूर आफत में पड़ गए .मजदूरों के पास जो हजार ₹500 जेब में थे.  वह भी खर्च हो गए.

इसके बाद देश के मजदूर पैदल व साइकिल से सैकड़ों हजारों किलोमीटर पैदल चलकर अपने गांव की ओर चल पङे.इस क्रम मे बार्डर पर आकर मजदूर अपनी ब्यथा सुनाए तो सबके रोए कांप उठे. सहरसा के मजदूर मनोज कुमार दरभंगा के शशि कुमार गया के अरविंद कुमार एवं बेगूसराय के दीपक प्रसाद ने बताया कि इस बार देश में लाक डाउन लागू हो जाने के बाद भुखमरी की समस्या खड़ी हो गई है.

 अपना घर प्रदेश छोड़कर दूसरे प्रदेशों में गए मजदूर काम बंद हो जाने के बाद भूखे प्यासे मजदूर अपने घर को लौट रहे हैं. घर में भी खाने को राशन व पैसे नहीं है .अभी सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर घर पहुंचना है. ऐसे में हालात में ही इस बार 1 मई को मजदूर दिवस पड़ रहा है .लंबे संघर्ष के बाद 1 मई को उनका अधिकार श्रम कानून बना था. लेकिन इस बार मजदूरों के सामने विकट समस्या खड़ी हो गई है .ऐसे हालात में सरकार को मजदूरों की मदद करने की जरूरत है.  विश्वभर में मजदूर दिवस 1 मई को मनाया जाता है इस दिन को अन्तराष्ट्रीय श्रम दिवस के रूप में भी मनाया जाता है.

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