Kaimur : बिहार का "कैमूर" जिला अपनी पौराणिक गाथाओं, सांस्कृतिक विरासत और मां मुंडेश्वरी की प्राचीन मंदिर के लिए विश्व प्रसिद्ध है। मां मुंडेश्वरी मंदिर,जहां बकरे की अहिंसक बलि की अनूठी प्रथा है। लेकिन कैमूर की पहाड़ियों में जिन प्राकृतिक संसाधनों को प्रकृति ने स्थापित किया है।
फ़ोटो - शेरगढ़ किला का तहखाना
जिसमें सुरम्य, सौम्य और अविरल, कल-कल, छल- छल बहते झरनों की झंकार, मनमोहक बांसुरी की मधुर तान से कम नहीं है।
फ़ोटो - तेल्हाड़ कुंड,अधौरा
फ़ोटो - नाचन कुंड, दुर्गावती डैम से दक्षिण 6 किमी
तेल्हाड़ कुंड, दुर्गावती जलाशय, नेटुआ कुंड, बंसी खोह वाटर फॉल, महादेव खोह वाटर फॉल, बुढवा वाटर फॉल, धुवां कुंड, कशिश वाटर फॉल, करकट गढ़ वाटर फॉल और पंचगुप्ता वाटर फॉल की धारा, धरा की सुंदरता को प्रतिपल अविश्वमरणीय बनाती है।
दुर्गावती जलाशय परियोजना
फ़ोटो - बारिश के बाद प्रकृति का नजारा
साथ ही कैमूर के बगल में रोहतास में तुतला भवानी,माँझर कुंड, रोहतासगढ़ का किला, शेरगढ़ का किला और चौरासन मंदिर अपनी अमिट पहचान के लिए जाना जाता है।
फ़ोटो - शेरगढ़ किला
फ़ोटो - मां मुंडेश्वरी मंदिर
ऐसे में एक ओर जहाँ वन और उसका स्वरूप कम हो रहा है।वहीं कैमूर और रोहतास अपनी गोद में आज भी इन्हें संजोए हैं।
फ़ोटो - सूरज की डूबती किरणें, ढलती सांध्य
फ़ोटो - कैमूर पहाड़ी का मनोरम दृश्य
अगर आप प्रकृति के असली नजारे को अनुभूति व आनन्द लेना व देखना चाहते हैं तो "कैमूर नहीं है बहुत दूर, एकबार आइए जरुर"... कैमूर वाइल्ड लाइफ सेन्चुरी आपके स्वागत को तैयार है।
फ़ोटो - शेरगढ़ किला से बगल दक्षिण से गुजरती दुर्गावती नदी
फ़ोटो - कैमूर पहाड़ी में बनाये गए रास्ते
फ़ोटो - दुर्गावती नदी
नोट : फ़ोटो - आशीष कौशिक
















