कैमूर : मां मुंडेश्वरी मंदिर में पहली बार 51 बकरों की अहिंसक बलि,गुड़गांव से आई किरण प्रभाकर PM मोदी की फैन, विपक्ष को कौरवों से की तुलना

भभुआ कैमूर। गुड़गांव की प्रसिद्ध समाजसेवी किरण प्रभाकर रविवार को कैमूर जिले के रामगढ़ के पवरा पहाड़ी पर स्थित मां मुंडेश्वरी मंदिर पहुंची। जहां मां मुंडेश्वरी मंदिर में सपरिवार 
मत्था टेंककर दर्शन पूजन की और देश व प्रदेश की खुशहाली की कामना की। इस दौरान उनका मन्नत पूरा होने पर 51 बकरें का अहिंसक बलि कराया गया और भंडारे में प्रसाद का भी वितरण किया गया।

भगवान को भी मिलेगा अच्छा घर
 उन्होंने कहा कि आने वाले समय में मैं यहां आस-पास के 100 गांव में स्थापित मंदिरों का भ्रमण करूंगी और मंदिरों को समृद्ध बनाने का काम करूंगी। जहां मंदिर के प्रांगण में वृक्षारोपण रंग रोगन आदि का कार्य होगा। ताकि जब गांव का मंदिर सही अवस्था में रहेगा, तभी गांव की वास्तु सही हो सकेगी। मेरा मानना है कि भगवान को भी अच्छा घर मिलना चाहिए। 
मनोकामना हुई पूरी 
 किरण प्रभाकर ने बताया कि उनका जन्मस्थली रोहतास में स्थित काराकाट है। वह मंदिर यात्रा पर इन दिनों बिहार में है। मां मुंडेश्वरी का आशीर्वाद लेकर अपनी यात्रा की शुरुआत की है। वह अपने परिवार के साथ माता रानी के दर्शन को यहां आई हैं। यहां आना उनके 7- 8 वर्ष से पुरानी मनोकामना थी। जो अब दर्शन पूजन कर मां के आशीर्वाद से पूरी हो गई। 

समाज की समृद्धि जरूरी
उन्होंने ने कहा कि मंदिर यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों से भी मुलाकात और संवाद का अवसर मिल रहा है। जिससे उनके सामाजिक जीवन के स्तर को समझ रही हूं। लोक कल्याण की भावना मेरे अंदर शुरू से रही है। मैं सबों के घरों को अपने घर की तरह सवारना चाहती हूं। सभी बच्चों को अच्छी शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा की पक्षधर हूं। मूलतः मैं यह कहूं कि मैं समाज की समृद्धि चाहती हूं और इसके लिए मैं लगातार कार्य करती रही हूं। 
पीएम मोदी के शासन से है प्रभावित
आगामी लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में उनकी भागीदारी को लेकर किए गए सवाल पर कहा कि मुझे जब राजनीति में आने का मौका मिलेगा तो मैं अपना बेस्ट करूंगी। मेरा दिल आज उस नेतृत्व में बसता है। जिसने देश में अभूतपूर्व बदलाव लाए हैं और धर्म का ध्वज लहराया है।  प्रधानमंत्री मोदी जी के शासन से प्रभावित हूं तो मुझे लगता है कि आगे अगर राजनीति में आना हो तो मेरा झुकाव उनकी दल के तरफ ही होगा।
विपक्ष को कौरवों से की तुलना
 उन्होंने विपक्ष की राजनीति पर कहा कि पांडव पांच थे फिर भी 100 कौरवों पर भारी पड़े। 
किरण प्रभाकर की शैक्षणिक पृष्ठभूमि सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से रही है। खुद किसान परिवार से आती हैं। इसलिए किसानों से उनका गहरा लगाव रहा है। किरण अपनी मातृभूमि के राजनीतिक और सामाजिक विकास के लिए काम करना चाहती है। 

मंदिरों का होगा जीर्णोद्धार
 जिसमें उन्हें उनके परिवार का भी साथ मिल रहा है। उन्होंने अपना शेष जीवन अपनी जन्मभूमि को 'वापस देने' में समर्पित करने का फैसला किया है। इसी के तहत वह मंदिर यात्रा पर बिहार आई हैं और अपने आस-पास के गांव में जाकर मंदिरों का जीर्णोद्धार करेंगी। साथ ही साथ समाज के गरीब तबकों के लिए भंडारे आदि की व्यवस्था भी करेंगी।

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !
To Top