# प्रकृति की रमणीयता व सुंदरता की छटा को देखने के लिए पर्यटक होते है आकर्षित
# 38 साल बाद 2014 में पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी द्वारा दुर्गावती जलाशय परियोजना का किया गया था उद्घाटन
# सीएम नीतीश कुमार भी दुर्गावती जलाशय का ले चुके है जायजा
# कैमूर व रोहतास के किसानों के खेतों की सिंचाई के लिए 1976 में तत्कालीन उपप्रधान मंत्री बाबू जगजीवन राम ने रखा था नींव
भभुआ/ कैमूर( बिहार). अगर आप इस नए साल पर पिकनिक मनाने के लिए स्थान का चयन कर रहे है तो आपके दुर्गावती जलाशय परियोजना पिकनिक मनाने के लिए बेस्ट होगा. क्योंकि यहां प्राकृतिक को खूबसूरत नजारों को नजदीक से देख सकते है. आइए अब हम आपको ले चलते है, बिहार की सभी परियोजना में से एक दुर्गावती जलाशय परियोजना के पास. यह बिहार के कैमूर जिले के रामपुर प्रखंड के कैमूर पहाड़ी के वादियों के बीच अवस्थित है. जहाँ नए साल के जश्न के लिए पिकनिक स्पॉट के रूप तैयार है और आपकी राह निरेख रहा है. अब यह पर्यटकों को लुभाने लगा भी है. कैमूर व रोहतास जिला की सीमा पर अवस्थित यह डैम यानी परियोजना अपनी रमणियता व प्राकृतिक सुंदरता को ले पूर्व से ही आकर्षण का केंद्र रहा है.
# एक बार देखने के लिए जरूर पहुँचते है पर्यटक
जब से दुर्गावती जलाशय परियोजना का निर्माण हुआ तब से लोग इसे एक बार देखने के लिए तो कैमूर,रोहतास व अन्य जिलों व राज्यो से आते है. यहाँ पर्यटक या दर्शक आते है तो पिकनिक का आनंद लेना नहीं भूलते है. प्रकृति की सुंदर वादियों, समुन्द्र की तरह शांत जल के बीच अठखेलिया का आनंद लेना, चारो तरफ हरा भरा वृक्ष, झाड़िया के बीच घूमना लोगो को एक अलग ही सुकून देता है. खास कर बच्चों के लिए जब बंदर एक डाली से दूसरे डाली पर उछलते कूदते देखते है उनका ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता है. इसके अलावा विशेष उत्सवों पर भी पिकनिक मनाने के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुँचते है. यहाँ प्राकृतिक मनोरम छटा देखने योग्य है. दुर्गावती डैम का नजारा वर्षा के दिनों सावन के महीना में और आनन्द दुगुना हो जाता है.
- झरना का भी उठा सकते है आनन्द
वर्षा के दिनो में दुर्गावती जलाशय के बाबा गुप्तनाथ जाने वाली दक्षिण तरह रास्ते में एक किमी की दूरी पर पहाड़ी से गिरने वाली पानी झरने सा प्रतीत होता है. यहाँ पर बरसात के दिनों में लोग दुर्गावती जलाशय घूमने के दौरान झरना का आनंद लेना नहीं भूलते है. यहाँ पर लोग पिकनीक में तरह तरह के व्यंजन बना कर खाते हुए जिंदगी के कुछ लम्हो को याद के रूप में संयोग कर रखना चाहते है. फिर कहा ऐसे मधुर पल मिल सकते है. 
- नए साल पर डीजे की धुन पर थिरकते हुए पिकनिक का लुफ्त उठाते है युवा
प्रखंड के कोने-कोने से डीजे, साउंड बाक्स सहित अन्य म्यूजिक सिस्टमों के साथ युवकों को टोली पिकनिक मनाने के लिए पहुँचती है. यहाँ पर पहुंच कर युवकों की टोली संगीत की धुनों पर सुबह से लेकर शाम तक थिरकते हुए नए साल के स्वागत करते हुए पिकनीक का लुफ्त उठाते है. वहीं यहाँ पर वन विभाग, सिंचाई विभाग, जलाशय, व पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी नए साल को अलग अंदाज में मनाने के लिए पिकनीक का मनाते है. पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के चाक चौबंद व्यवस्था की जाती है.
दुर्गावती जलाशय परियोजना रोहतास के शेरगढ़ पहाड़ी व कैमूर के राजादेव टोंगर के पास की पहाड़ी के बीच से बहने वाली दुर्गावती नदी पर बनाया गया है. इसके निर्माण का उद्देश्य कैमूर व रोहतास के 33 हजार हेक्टेयर भूमि का सिंचाई करना है. इस योजना का शिलान्यास 1976 में तत्कालीन उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम ने किया था। इसके बाद इसके निर्माण में कई प्रकार की अड़चने आयी लेकिन 38 साल बाद वर्ष 2014 में मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी इस परियोजना का उद्घाटन किया गया
सूत्रों के अनुसार दुर्गावती नदी खुखुमा नाम के पहाड़ पर बांस के कुपड़ में से निकली है. इसमें से सदैव पानी बहती रहती है. यही से निकलने के बाद आगे जाकर एक नदी का रूप धारण कर लिया है. डैम के पूर्वी तट पर शेरगढ़ का प्राचीन भूमिगत किला है जो दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, इसे भी लोग दुर्गावती जलाशय घूमने के बाद शेरगढ़ के किला को घूमना नहीं भूलते है. इस किले की रहस्यमयी दीवार जो पहाडी को काट कर बनाया गया है वो देखते ही बनता है. यहाँ से कुछ ही दूरी पर भुड़कुड़ा का प्राचीन किला भी सैकड़ों वर्षों से विद्यमान है. वहां जाने वाले सैलानी दर्शको को भ्रमण के लिए पूरा एक दिन भी समय कम पड़ जाता है. शेरगढ़ की ऊपरी प्राचीर से दुर्गावती जलाशय का विहंगम दृश्य देखते ही बनता है. साल दर साल बढ़ रही पर्यटकों की भीड़ आने वाले दिनों में इस स्थल को पर्यटन का नया केंद्र स्थापित कर सकता है.
- सुविधा के नाम पर अभी कुछ नहीं है
दुर्गावती जलाशय पर प्रशासन के तरफ से अभी कोई सुविधा नहीं होता दिख रहा है. लोग यहाँ पर एक बार डैम को जरूर देखने के लिए आते है तो पिकनीक मनाना नहीं भूलते है. यहाँ पिकनीक में भोजन के रूप में ज्यादातर लोग ताजा ताजा मछली खाना पसंद करते है. यहाँ पर मछुआरे नाव व ट्यूब पर बैठ कर जाल से मछली मारते है. ताजा ताजा बड़ी बड़ी मछलिया दो से ढाई सौ रुपये किलो की मिलती है. ताजा मछली सभी जगह नहीं मिलने के कारण पिकनीक के रूप में मछली को तल कर खाना लोग काफी पसंद करते है.





