विदेशी दम्पति ने गंगा की गोद में किया शिवार्चन व रुद्राभिषेक, कहा इस तरह की अप्रतिम संस्कृति कहीं भी नहीं


कैमूर लाइव न्यूज़ ब्लॉग पोस्ट न्यूज़ डेस्क @ बंटी जायसवाल
# वैदिक एजुकेशनल रिसर्च सोसाइटी एवम ग्लोबल पंचतत्व शांति ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में गंगा की गोद मे फूलों से सजे नाव पर 51 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा किया गया रुद्राभिषेक 
वाराणसी. बुधवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर वैदिक एजुकेशनल रिसर्च सोसाइटी एवम ग्लोबल पंचतत्व शांति ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में गंगा की गोद मे फूलों से सजे नाव पर 51 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा शिवार्चन करते हुए रुद्राभिषेक सम्पन्न हुआ. विगत 7 वर्षों से विश्वशांति एवम संपन्नता हेतु इस कार्यक्रम के मुख्य यजमान की भूमिका में जर्मनी के विख्यात दार्शनिक एवम ज्योतिषी नरवट वायस अपनी पत्नी सुशाने के साथ भारत की यात्रा करते हुए काशी आते हैं और भक्ति-भाव से युत दंपति युगल महाशिवरात्रि के दिन शिवार्चन सह रुद्राभिषेक सम्पन्न करते हैं. सोसाइटी के अध्यक्ष विख्यात ज्योतिषी जगतशिष्य पंडित शिवपूजन चतुर्वेदी ने बताया कि विश्व की संपन्नता और शांतिमय वातावरण के प्रति नरवट सदैव चिंतित रहते हैं और वैदिक धर्म पर अटूट श्रद्धा और विश्वास के कारण अपनी व्यस्ततम दिनचर्या होने के बावजूद भी नरवट इस कार्यक्रम हेतु भारत की यात्रा सुनिश्चित करते हैं. गंगा की गोद मे अभिषेक के अनंतर ढोलक, झाल, मजीरा, हारमोनियम आदि वाद्ययंत्रों के साथ शिव भजन, शिव बारात गीत होली गीत नरवट वायस के पत्नी सुशाने को हृदय को आह्लादित कर दिया. 

सुशाने कहती हैं इस तरह की अप्रतिम संस्कृति एकमात्र भारत की ही हो सकती है. यहां की विविधता में एकता हमे भारतीय संस्कृति वैश्विक संस्कृति है. यह कहने को बाध्य करती है. बरबस मन भारत आने को तरंगायित हो जाता है. कार्यक्रम में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष प्रो रामजीवन मिश्र ने कहा की अपनी सरस और सरल भारतीय वासंतिक संस्कृति किसे अच्छी नहीं लगती? वसन्तराज तो सभी के मन पर राज करते हैं. डॉ वेदप्रकाश शर्मा ने शिवरात्रि के आध्यात्मिक विशेषताओं से परिचित कराया तो डॉ रामनारायण पांडेय ने शिवतत्त्व, ब्रह्मतत्त्व, विष्णुतत्व को विस्तार से बताया. गंगा के गोद मे रुद्राभिषेक की यात्रा अस्सी घाट से प्रारंभ होकर मीर घाट तक गयी वहां भगवान भूतभावन को शिवरात्रि के गीत श्रवण कराते हुए अस्सी घाट पर यात्रा पूर्ण हुई. कार्यक्रम में डॉ राजीवरंजन तिवारी, सच्चिदानंद चतुर्वेदी, अमूल्य उपाध्याय, सुनील जी समेत सभी वरिष्ठ विद्वज्जन उपस्थित थे.

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