आधुनिकता के इस युग में यहां सड़को पर होती है धान की बोझे की दवनी, रोज बनता है खलिहान

वाहन चालकों को परेशानी, दुर्घटना की आशंका

कैमूर लाइव न्यूज़ से बंटी जायसवाल 

भभुआ कैमूर. धान की फसल तैयार हो चुकी है और किसान,मजदूर द्वारा खेतों में फसल की कटाई शुरू है। कटाई के बाद किसानों द्वारा धान की बने बोझे की दवनी भी ट्रैक्टर से कराया जा रहा है। आधुनिकता के इस युग में तो अब दवनी के बदले धान झाड़ने वाले थ्रेसर में धान के बोझे को डाल देने पर धान अलग व पुआल अलग हो जा रहा है। धान की फसल की दवनी ट्रैक्टर से खलिहान में होते हुए देखा या सुना होगा। लेकिन कैमूर में कुछ ऐसे गांव है जहां पर मजदूर किसान धान की फसलों की दवनी सड़को पर होती है। 

दवनी की जुगाड़

धान फसल की दवनी की जुगाड़ आधुनिकता के इस युग में भी एक अलग अंदाज में देखने को मिलता है। जिसे देख कर आप भी हैरान हो जाएंगे। मजदूर किसान के लिए यह जुगाड़ तो फायदे की बात है। 
लेकिन अन्य के लिए यह जानलेवा साबित हो सकती है। मजदुर वर्ग के लोग श्रम व समय बचाने के लिए कैमूर के सबार - भभुआ मुख्य सड़क पर ही धान की दवनी के लिए खलिहान बना चुके है. दिनभर सड़क पर आते जाते वाहनो से कुचल कर पुआल अलग व  धान अलग हो जाता है. शाम होते ही धान की फसल के डंठल को हटाकर अनाज बटोर लिया जाता है. 

हादसे की आशंका 

इस दौरान वाहन चालकों को हादसे की आशंका बनी रहती है. सूत्रों के अनुसार कई बार बाइक सवार लोग सड़क पर बिछाए गये धान की बोझा से गिर कर घायल भी हो जाते है. उक्त सड़क से प्रतिदिन पुलिस प्रशासन का गाड़ी गुजरता है लेकिन फिर इस ओर ध्यान नहीं जाता है. मजदुर बताते है कि थोड़ी बहुत धान की बोझा दूसरे किसानों के पास कटाई में मिलते है. खलिहान नहीं रहने से सड़क पर ही धान के बोझे को रख दिया जाता है। जिससे शाम होते होते धान अलग हो जाता है। 

हर साल का काम

ऐसा नजारा कैमूर जिले के सबार भभुआ मुख्य सड़क पर पांडेयपुर पर देखने को मिला है। जानकार सूत्रों का कहना है कि यह एक साल की बात नहीं है। अभी तो कुछ कम है। लेकिन हर साल पांडेयपुर, झाली, बहेरी,आदि गांव के सड़को पर होता है। अगर ऐसा होता है तो इससे होने हादसे की आशंका को रोकने के लिए सड़क को खलिहान न बनाया जाये. सड़क सभी के लिए है। इसे साफ सुथरा रखना सभी का कर्त्तव्य है।

#वाहन चालकों को परेशानी 

सबसे ज्यादा परेशानी तो बाइक वाले,टेंपू वाले, कुछ छोटे बड़े वाहन वाले लोगो को भी परेशानी होती है. बाइक चालको ने बताया कि जब बाइक सवार उक्त सड़क से यात्रा करते है तो अचानक बिछाए गए धान पर चढ़ते ही फिसल कर बाइक सवार गिर सकते है नहीं तो उनके बाइक में पुआल फंस जाता है और गिर कर घायल हो जाते है. उनका वाहन भी ख़राब हो जाता है. टेंपू में भी पुआल फँस जाता है. इस स्थिति में दुर्घटना की संभावना बनी रहती है. इस तरह सड़क साफ सुथरा रहने के बजाय धान के बोझा से निकलने पुआल के कई टुकड़े से गंदगी भी फैला रहता है.

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