मां मुंडेश्वरी धाम में लगने लगा है श्रावणी मेला, महामंडलेश्वर चतुर्भुजी शिवलिंग पर कांवरिया करते है जलाभिषेक

#सुरक्षा व विधि-व्यवस्था को लेकर किया गया है पुख्ता इंतजाम
# धाम में सफाई, प्रकाश, पेयजल की गयी है व्यवस्था
भभुआ/कैमूर(बंटी जायसवाल). बिहार के कैमूर जिले के भगवानपुर प्रखंंड के रामगढ़ गांव स्थित 600 की फिट की ऊंचाई पर विश्व का प्राचीन मंदिरों में मांं मुंडेश्वरी मंदिर शुमार है. यहां पर हर साल सावन महीने में एक माह तके श्रावणी मेला शुरू होता है. इस बार श्रावणी मेला का बुधवार को सावन महीना शुरू होते ही मुंडेश्वरी धाम से शुरू हो गया. मेला परिसर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा व विधि-व्यवस्था का पुख्ता इंतजाम किया गया है. श्रद्धालुओं को आने-जाने के लिए सुगम मार्ग बनाया गया है. माता के धाम पर धूप होने से श्रद्धालुओं का पैर न जले इसके लिए मैट बिछाया गया है. धाम परिसर में स्वच्छता का खास ध्यान रखा गया है. पेयजल व प्रकाश का भी प्रबंध किया गया है. लोगों का कहना है कि सावन मास की शुरुआत होते ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगती है. वही सावन के हर सोमवारी को सबसे ज्यादा भीड़ लगती है. यहां पर मां मुंडेश्वरी मंदिर के गर्भगृह में महामंडलेश्वर चतुर्भुजी शिवलिंग स्थापित है. सावन के हर सोमवारी को कांवरिया भक्तों द्वारा जलाभिषेक किया जाता है. इस दौरान हर हर माहादेव के जयघोष से धाम परिसर गूंज उठता है. 
गुप्ताधाम से जलाभिषेक के बाद दर्शन के लिए आते है कांवरियां
रोहतास के चेनारी स्थित बाबा गुप्ता धाम में जलाभिषेक करने के बाद मां मुंडेश्वरी का दर्शन के लिए श्रद्धालु जरूर आते है. कोई पैदल तो कोई वाहनों से यहां पहुंचता है. बोल बम के जयकारा से पूरा पवरा पहाड़ी गूंज उठती है. जलाभिषेक करने के लिए उन्हें लंबी कतार में अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है. उन्हें कतारबद्ध करने के लिए महिला व पुरुष पुलिस जवानों की प्रतिनियुक्ति की जाती है. मेला परिसर में मेडिकल टीम भी तैनात रहती है. यहां किस्म-किस्म के वेश में कांवरिए आते हैं. श्रावणी मेला के दौरान यूपी, बिहार, झारखण्ड के कई जिलों के श्रद्धालुओ व सैकड़ों कांवरियो का दल हर साल जलाभिषेक व पूजा-अर्चना करने आता है. 
घण्टियों की झंकार से गूंज रहा है पवरा पहाड़ी
एक से बढ़कर एक आकर्षक कांवर लेकर कांवरिए धाम परिसर में आते हैं. कांवर में लटक रही घंटियों की झंकार से पवरा पहाड़ी गूंज उठती है. कांवरिए भी कई वेश में दिखते हैं, लेकिन कहलाते सिर्फ ‘बम हैं. किसी का कांवर मखमल के कपड़ों से सजा होता है, किसी का रंगीन प्लास्टिक से और किसी का रंग-बिरंगे कपड़ों से. कांवरिए अपने कांवर को अनेक प्लास्टिक के सांप व फूलों, घंटियों, धातुओं से सजाए रहते हैं. बहंगी से लटकती डोर के नीचे काठ के बने घाट में जलपात्र होते हैं. कावरियां मां मुंडेश्वरी के गर्भगृह स्थित चतुर्भुजी शिवलिंग पर जलाभिषेक करते है. 

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !
To Top