स्व. रामबच्चन पहलवान के पुण्यतिथि पर 5 नवम्बर को कैमूर के अधौरा में आयेंगे पप्पू यादव, होगा सांस्कृतिक कार्यक्रम

फ़ोटो - फाइल 
भभुआ/कैमूर। जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव 5 नवम्बर को कैमूर के अधौरा में आएंगे. उक्त आशय की जानकारी देते हुए पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता दीपक यादव ने बताया की पार्टी अध्यक्ष पप्पू यादव उस दिन आरा कोचस मोहनिया होते हुए भभुआ जिला के अधौरा प्रखंड के डुमरकोन गांव पहुंचेंगे और स्व. रामबच्चन यादव पहलवान के पुण्यतिथि समारोह में भाग लेने के तत्पश्चात तेल्हाड कुंड स्थित गेट का उद्घाटन भी करेंगें. इस दौरान अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया है। जिसमें प्रमुख रूप से भोजपुरी फिल्म का नायक सह गायक प्रमोद प्रेमी और नायिका प्रिया राज के साथ स्थानीय कलाकार भी अपनी कला प्रस्तुत करेंगें.
स्व. रामबच्चन पहलवान पर एक नजर
कैमूर के अधौरा पहाड़ के घाटियों के बीचों बिच स्थित डुमरकोन गांव के स्व. रामबच्चन पहलावान विशुध्द रूप से पहलवान होने के साथ ही भोलेपन और सादगी के पहचान थे. मां-बाप के एकलौते पुत्र होने के नाते परिवार में बहुत ही लाड़-प्यार में इनका पालन पोषण हुआ था. बचपन में ही पिता की मृत्यु हो जाने से परिवार की सारी जिम्मेवारीया इनका कंधों पर आने लगी. इसी दौरान लगभग 80 के दशक में इस पहाड़ के घाटियों में दस्यु सरगनाओं के द्वारा गोलियों की तड़-तडाहट से पुरा घाटी दहल चुका. घाटी में शुरू गैंगवार में स्थानीय गरीब मजदूरों सहित आदिवासियों का पलायन होने लगा. प्रशासन इन सरगनाओं को सम्भाल पाने में असहाय नजर आने लगा. सादगी और समाजिक रुझान होने की वजह से लोगों के आह्वान पर स्व. रामबच्चन पहलावान ने सर्व प्रथम शासन-प्रशासन से मिलकर घाटी में शान्ति स्थापित करने की कोशिश की परन्तु सफल नहीं हो पाने पर स्वयं बन्दूक उठाईं. घाटियों में गैंगवार अब बढ़ तेजी से बढ़ चला था. दोनों तरफ से सैकड़ों मौतों का सिलसिला शुरू हुआ. उस जमाने में केन्द्र और राज्य सरकारों ने स्व रामबच्चन पहलवान पर लगभग 10 लाख तक का इनाम रखा था. हैरानी इस बात की जीवनपर्यंत स्व रामबच्चन पहलवान अपने दामन पर बलात्कार चोरी,  डकैती, छिनैती, लूटपाट जैसे कोई घिनौनी दाग नहीं लगने दिया. घाटी में जीवनयापन कर रहे लोगों पर अत्याचार नहीं किया. इसके बाबजूद इनके ऊपर 70-80 हत्याओं का मुकदमा दर्ज किया गया. सभी केस में बरी होने के बाद सन  1990 से लेकर 2000 तक चैनपुर और भभुआ विधानसभा से चुनाव लड़े मगर किसी दल से प्रत्याशी नहीं होने की वजह से हमेशा हार का मुंह देखना पड़ा।विधायक बन सपना पुरा किए रामचन्द्र यादव समय बदला और इन्हीं के परिवार से आने वाले 22 वर्षिय क्रान्तिकारी सदस्य भभुआ विधानसभा के विधायक बनें और उतने ही कम उम्र में बहुजन समाज पार्टी के बिहार प्रभारी होने के साथ साथ विधायक दल के नेता भी हुए.

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