कैमूर के बड़वा पहाड़ी पर खुदाई में मिल रहा मंदिर होने का प्रमाण, साक्ष्य के रूप में मंदिर अवशेष, महाशिवरात्रि पर लगता है मेला

समिति के सदस्यों द्वारा की जा रही है तैयारियां

भभुआ कैमूर(बंटी जायसवाल)। कैमूर जिले के रामपुर प्रखंड के नोहट्टा गांव के पास बड़वा पहाड़ी है। जहां महाशिवरात्रि के मौके पर मेला लगता है। पहाड़ी के 500 फीट से अधिक ऊंचाई पर कैलाश गिरी भगवान भोलेनाथ का प्राचीन शिव मंदिर है। जिसके पीछे इन दिनों समिति के सदस्यों द्वारा साफ सफाई एवं फर्श बनाने के दौरान मंदिर के पीछे खुदाई करने पर मंदिर का अवशेष मिला है। 

जिसको लेकर क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा होने लगी है कि जहां आज शिव मंदिर है वहां पहले मंदिर होगा। तभी तो मंदिर का अवशेष में मिल रहा है।  जानकारी होने के बाद नौहट्टा गांव के बडवा पहाड़ी के 500 फीट से अधिक ऊंचाई पर शिव मंदिर के पास पहुंची।

 जहां समिति सदस्यों द्वारा श्रद्धालुओ को परिक्रमा करने के लिए बराबर करने के लिए खुदाई किया गया। मंदिर के पीछे में ही खुदाई करने पर प्राचीन मंदिर होने का साक्ष्य के रूप में मंदिर के अवशेष  मिल रहे हैं। जिसे समिति के सदस्यों द्वारा खुदाई करने में मिलने वाले अवशेष को बगल में साइड में रखा गया है। 

उस अवशेष में मंदिर के गुंबद होने के छोटे टुकड़े, पत्थरों पर चित्र उकेरे गए बड़े  पत्थर मिले है। पुजारी बग्गी प्रसाद,समिति के अध्यक्ष अर्जुन सिंह,अरविंद कुमार सहित सदस्यों ने बताया कि  नौहट्टा के बड़वा पहाड़ी के शिव मंदिर पर महाशिवरात्रि के मौके पर मेला लगता है। यहां कैमूर जिले का अलावा यूपी, बिहार के विभिन्न जिलों के श्रद्धालु भक्त दर्शन पूजन के लिए आते है। 

 महाशिवरात्रि इस बार 18 फरवरी को मनाया जाने वाला है। जिसको लेकर तैयारियां की जा रही है। श्रद्धालुओं के शिव मंदिर परिक्रमा के दौरान पत्थरों की वजह से चोट लगने की संभावना को देख कर उसे खुदाई कर बराबर किया जा रहा था। इसी दौरान हमें मंदिर के पीछे में पहले के पहाड़ी में दबे हुए प्राचीन मंदिर होने के साक्ष्य के रूप में मंदिर के अवशेष मिल रहे है।

 अभी तो 1 से 2 फीट की खुदाई की गई है। इसमें ही मंदिर के अवशेष मिल गए है। अगर सरकार एवं पुरातत्व विभाग द्वारा बड़वा पहाड़ी शिव मंदिर के पास पीछे में खुदाई कराया जाए तो एक बड़े प्राचीन मंदिर होने के अवशेष मिल सकता है। अब यह मंदिर कौन सा होगा कहना कठिन है।

 लेकिन पूर्वजों द्वारा बताया जाता है कि यहां पर ले जहां खुदा किया गया है वहां प्राचीन शिव मंदिर हुआ करता था। जिसे मुस्लिम शासक औरंगजेब के शासनकाल में मंदिर को नष्ट किया जा रहा था। उसी समय शायद प्राचीन शिव मंदिर पहाड़ी पर था। उसे भी नष्ट किया गया होगा। जिसका अब अवशेष भी मिल रहा है। 

नौहट्टा गांव के लगभग 80 वर्षीय नयन कुमार जायसवाल ने बताया कि मैं जब छोटा था तो पहाड़ी पर जाता था। अभी वर्तमान में शिव मंदिर में जो शिवलिंग है वह पहाड़ी से ही निकला था। गांव के हैं स्वर्गीय भैया राम  महतो द्वारा मंदिर को ग्रामीणों के सहयोग से बनवाया गया था। 

उस समय खुदाई के समय प्राचीन मंदिर के बड़े-बड़े पत्थर और अवशेष मिले थे। जिसे मंदिर निर्माण के दौरान वर्तमान के शिव मंदिर में लगा दिया गया था। मंदिर के पीछे खुदाई में प्राचीन शिव मंदिर के अवशेष मिल रहे है। इससे तो प्रतीत होता है कि वहां पहले शिव मंदिर जरूर होगा। 

तभी तो प्राचीन शिवलिंग निकला  हुआ था। जिसे वर्षो से पूजा अर्चना की जाती है। यहां पर श्रद्धालुओ की मन्नत भगवान भोले नाथ पूरी करते है। तभी तो महाशिवरात्रि के मौके पर लाखों की संख्या श्रद्धालु आते है पूजा अर्चना करते है और मेला लगता है।

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