प्रकृति की गोद में दुर्गावती जलाशय का दीदार कर मनाए नए साल का जश्न, न्यू ईयर से पहले ही बोटिंग का बढ़ गया फीस, देना होगा इतना पैसा


पिकनिक मनाने, घूमने के साथ नौकाविहार का उठा सकते है आनंद


नए साल से पहले ही नौकविहार करने का फीस हुआ दुगुना, लोगों पर बढ़ेगी आर्थिक बोझ


वन विभाग की टीम रहेगी तैनात, हर गतिविधियों पर रखेगी नजर


पिकनिक मनाने के लिए पहुँचते है कैमूर व रोहतास जिले के हजारों लोग 


भभुआ कैमूर (बंटी जायसवाल)। बुधवार से नव वर्ष 2025 शुरू हो जायेगा। नए साल के जश्न व पिकनिक मनाने को लेकर युवाओं द्वारा जोर शोर से तैयारियां कर ली गयी है। कई युवाओं की टोली द्वारा पिकनिक की तैयारियां की जा रही है। अगर आप भी नए साल में प्रकृति की वादियों में सैर करना, सुंदर व मनोरम छटा का आनंद लेना और पिकनिक मनाने की सोच रहे है तो आपके लिए दुर्गावती जलाशय परियोजना यानी करमचट डैम एक अच्छा ऑप्शन होगा। इसके अलावा तेल्हाड़ कुंड, करकटगढ़ जलप्रपात, मां मुंडेश्वरी धाम भी ऑप्शन है। जहां नए साल पर घूमने, बोटिंग का आनंद उठाने के साथ पिकनिक मना सकते है।


यह जलाशय(डैम) प्रकृति व पहाड़ो के बीच सुंदर व मनोरम वादियों के बीच अवस्थित है। जो रमणीयता व सुंदरता को लेकर नए साल या अन्य समय पर आने वाले लोगों व सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। पहाड़ो की सुंदर वादियों, समुन्द्र की तरह शांत जल, शीतल हवाए, चारो तरफ हरा भरा वृक्ष, झाड़ियों के बीच सैर करना मन को शांति, दिल को सुकून देता है। नए साल आने पर लोग पिकनिक भी मनाते आते है।  नए साल पर जलाशय में वन विभाग द्वारा शुरू किए गए बोटिंग का आनंद परिवार के साथ पहुंच कर उठा सकते है। 

युवाओं के लिए पसंदीदा है पिकनिक स्पॉट

दरअसल, दुर्गावती जलाशय बनने के कुछ सालों बाद से लगातार पिकनिक मनाने के लिए हमेशा लोग आते रहते है। सबसे ज्यादा युवा वर्ग के ही लोग पिकनिक मनाने के लिए पहुचते है। यहां नववर्ष, अन्य त्योहारों व संडे को पिकनिक मनाने के लिए कैमूर, रोहतास जिले के हजारों की संख्या में युवाओ की टोली व लोग पहुँचते है। बिहार, यूपी, झारखंड राज्यों के भी पयर्टक भी यहां की सुंदर वादियों में घूमने के लिए आते रहते है।


दो जिलों को अलग करता है दुर्गावती नदी, जिस पर बना है डैम


दुर्गावती जलाशय परियोजना को करमचट डैम के नाम से भी जाना जाता है। यह जलाशय परियोजना (डैम) कैमूर व रोहतास जिले की सीमा पर स्थित है। दुर्गावती नदी ही कैमूर व रोहतास जिले को अलग करती है। जिस पर डैम को बांधा गया है। इसलिए इसे दुर्गावती जलाशय परियोजना कहा जाता है। दुर्गावती नदी पर शेरगढ़ के पहाड़ी व राजदेव टोंगर पहाड़ी के बीच डैम का निर्माण किया गया है। जिसकी लंबाई लगभग 1 किमी बतायी जाती है। 

1976 में रखा गया था दुर्गावती जलाशय का नींव


दुर्गावती जलाशय परियोजना का नींव 1976 में उप प्रधानमंत्री रहे बाबू जगजीवन राम द्वारा रखा था। इसका उद्देश्य कैमूर व रोहतास जिले के हजारों किसानों के खेतों की सिंचाई करना था। जिसके निर्माण में कई प्रकार की अड़चनें आती रही। जो सालों तक राजनीतिक मुद्दा भी बनता रहा।


 जो 38 सालों की लंबे समय के बाद अंत में पूरा हुआ। जिसका उद्घाटन वर्ष 2014 में पूर्व उपमुख्यमंत्री व वर्तमान में हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के संयोजक जीतन राम मांझी ने किया था। जिसके बाद कैमूर व रोहतास जिले के किसानों की खेतों में इस जलाशय के पानी को नहर वितरणी व कैनाल के माध्यम से पहुँचा कर सिंचाई होने लगी। इस परियोजना से जलाशय की पानी को दुर्गावती नदी में छोड़ा जाता है। ताकि नदी के माध्यम से रामगढ़ के क्षेत्र में भी पानी मिलता है।


इस बार पर्यटको को बोटिंग के लिए देना होगा दुगुना पैसा


दुर्गावती जलाशय परियोजना को घूमने व पिकनिक मनाने के लिए आने वाले लोगों को देखते हुए पर्यटन के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है।यहां आने वाले पर्यटकों के लिए सुविधाओ को बढ़ाकर और विकसित किया जा रहा है। वन विभाग द्वारा दो साल से पर्यटको के लिए बोटिंग की सुविधा शुरू की गई है। जिसके बाद से यहां भारी संख्या में पर्यटक आ रहे है। प्रकृति के बीच जलाशय घूमने के साथ बोटिंग भी कर रहे है।


 पहले प्रति व्यक्ति 50 रुपए में बोटिंग करते थे। बोटिंग काउंटर से मिली जानकारी के अनुसार, इस बार नए साल के पहले 27 दिसंबर से ही वन विभाग द्वारा बोटिंग करने की फीस दुगुना कर दिया गया। यानी अब पर्यटकों को बोटिंग के लिए 50 रुपए के बदले 100 रुपए प्रति व्यक्ति देना होगा। तभी आप बोटिंग कर पाएंगे। पर्यटकों ने बताया कि वन विभाग द्वारा 100 रुपए प्रति व्यक्ति बोटिंग फीस करने से लोगों पर आर्थिक बोझ पड़ेगा। वन विभाग को अचानक से बोटिंग का फीस दुगुना नहीं करना चाहिए। क्योंकि इधर बीच डीजल या पेट्रोल का कीमत भी नहीं बढ़ा है।


 ऐसे पहुँचे दुर्गावती जलाशय 


दुर्गावती जलाशय परियोजना तक पहुँचने के लिए दो रास्ते है। एक कैमूर से एक रोहतास से है। जिसमें एक रास्ता कैमूर जिले के भभुआ सबार पथ से जिला मुख्यालय से 23 किमी सबार पहुँचने के बाद सबार से लगभग 10 किमी दक्षिण भीतरीबांध जाने वाले पथ से पहुँचा जा सकता है।इसकी कुल दूरी 35 किलोमीटर हो जायेगी। वही दूसरा रास्ता रोहतास के सासाराम से चेनारी 40 किमी, चेनारी से दक्षिण में 12 किमी मल्हीपुर पथ में मल्हीपुर गांव से होते 4 किमी  बादलगढ़ और दुर्गावती जलाशय परियोजना तक पहुँच सकते है।

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